अधिवक्ता परिषद अजयमेरू ने अंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में मनाया सामाजिक समरसता दिवस

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अजमेर। अधिवक्ता परिषद राजस्थान क्षेत्र चित्तौड़ प्रांत की अजयमेरू इकाई की ओर से सोमवार को भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की 135वीं जन्म जयंती के उपलक्ष में सामाजिक समरसता दिवस कार्यक्रम राजस्व मंडल के अभिभाषक संघ सभागार में आयोजित किया गया।

मुख्य वक्ता सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर डॉ मनोज कुमार बहरवाल रहे, कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान राजस्व अभिभाषक संघ के अध्यक्ष शंकर लाल जाट ने की। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डा योगेंद्र ओझा मुख्य अतिथि रहे।

इस अवसर पर बार सचिव रूपेंद्र कुमार परिहार ने बाबा साहब के संघर्षमय जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके द्वारा किए गए कार्यों और उनके अमूल्य योगदान के बारे में बताया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ओझा ने कहा कि डॉ. आम्बेडकर एक व्यक्ति नहीं एक विचार हैं जो कभी ख़त्म नहीं हो सकता। बाबा साहब ने हमेशा से आह्वान किया शिक्षित बनो संगठित रहो संघर्ष करो।

मुख्यवक्ता प्रोफेसर बहरवाल ने कहा कि डॉ भीमराव आंबेडकर ने विषम परिस्थितियों में भी समाज को राष्ट्र को बहुत बड़ा योगदान दिया है। उन्होंने आंबेडकर के राष्ट्र के प्रति विचारों के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि आंबेडकर ने हर परिस्थिति में समाज, जाति और धर्म से उठकर राष्ट्रहित के लिए सदैव तत्पर खड़े रहने की बात कही। आंबेडकर के जीवन को पढ़े बिना उनके विचार नहीं समझे जा सकते। केवल सुनी सुनाई बातों से समाज में केवल भ्रांतियां ही फैलेंगी।

डॉ भीमराव आंबेडकर सदैव बंधुत्व के भाव को आगे लेकर चलते रहे। उनका मानना था कि बिना बंधुत्व के सामाजिक समरसता का भाव अग्रसर नहीं हो सकता। समाज में जब तक बंधुत्व की भावना नहीं होगी तब तक एक दूसरे के प्रति द्वेष कम नहीं होगा। इसलिए बंधुत्व की भावना सर्वोपरि है और सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक न्याय सभी को प्राप्त हो उसके लिए आवश्यक है कि बंधुत्व की भावना सभी में हो।

मुख्य वक्ता ने बताया कि डॉ भीमराव आंबेडकर को विशाल व्यक्तित्व, पद, पैसे पीढ़ी से विरासत में नहीं मिले, अपमान का विष पीकर भी डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने समाज, राष्ट्र को अमृत दिया। उनके द्वारा जो कार्य किए गए उनमें वर्ग विशेष के प्रति किसी भी प्रकार का कोई द्वेष नहीं दिखेगा।

उनका सुवाक्य हम सबसे पहले भारतीय हैं, संविधान की प्रस्तावना में हम भारत के लोग में हम शब्द परस्पर सहमति के सन्दर्भ में हैं। भारतीय परंपरा में वंश से ऊपर उठकर भौगोलिक के साथ-साथ सांस्कृतिक एकता भी रही है और इस प्रकार वंश से बढ़कर भारत की एकता है जाति और पंथ से ऊपर देश को, राष्ट्र को प्रथम मानना उनका मुख्य वाक्य रहा रहा है। मुख्य वक्ता ने आह्वान किया कि हम सभी को संविधान सभा में हुई चर्चा का अध्ययन अवश्य ही करना चाहिए।

अंत में अजयमेरू इकाई के अध्यक्ष भवानी सिंह रोहिला ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन अजयमेरु इकाई के महामंत्री भरत कुमावत ने किया। कार्यक्रम में प्रांत के विशेष आमंत्रित सदस्य उमरदान सिंह लखावत, जयप्रकाश शर्मा, लक्ष्मीकांत शर्मा, प्रांत के कार्यालय मंत्री भूपेन्द्र सिंह चौहान, सिविल न्यायालय तथा राजस्व मण्डल के विद्वान अधिवक्तागण उपस्थित रहे।