न्यायिक सुधारों में नैतिक साहस आवश्यक : न्यायमूर्ति बिपिन गुप्ता

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जयपुर। अधिवक्ता परिषद राजस्थान के जयपुर प्रांत की ओर से राष्ट्रीय युवा दिवस पर आयोजित न्यायिक सुधारों में युवाओं की भागीदारी समारोह में मुख्य अतिथि उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति बिपिन गुप्ता ने युवा अधिवक्ताओं को नैतिक साहस और आंतरिक दृढ़ता को न्यायिक पेशे की आधारशिला बनाने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति गुप्ता ने कहा कि तकनीकी सुधार तभी सार्थक सिद्ध होंगे जब उनके पीछे वकील का चरित्र मजबूत हो और सत्य के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता बनी रहे। उन्होंने जोर देकर कहा कि न्याय व्यवस्था की सफलता बाहरी बदलावों से नहीं, बल्कि प्रत्येक अधिवक्ता के आंतरिक बल से निर्भर करती है। युवा वकीलों को चुनौतियों से घबराने के बजाय नैतिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

कार्यक्रम के अध्यक्षीय उदबोधन में प्रांत महामंत्री अभिषेक सिंह ने न्याय मम धर्मः को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने न्यायिक सुधार को समाज की आस्था मजबूत करने वाली प्रक्रिया बताया, जिसमें व्यक्तिगत आचरण से शुरुआत होनी चाहिए। स्वामी विवेकानंद के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए युवाओं से व्यक्तिगत, सामूहिक और राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय होने को कहा।

अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के क्षेत्रीय मंत्री कमल परसवाल ने सामूहिक सहयोग पर बल दिया। उन्होंने न्याय मम धर्मः को जीवन-दर्शन बताते हुए कहा कि न्यायाधीश, अधिवक्ता और कर्मचारी एकजुट हों। कार्यक्रम का संचालन मीनल भार्गव ने किया। विषय-प्रवर्तन रूपेंद्र सिंह राठौड़ और संगठन-परिचय अखिल दाधीच ने दिया। इकाई अध्यक्ष धर्मेंद्र जैन ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उपाध्यक्ष सोनिया शांडिल्य, बार अध्यक्ष राजीव सोगरवाल और महामंत्री दीपेश शर्मा उपस्थित रहे।