ओझल किए जाने के बाद सिरोही का रास्ता भूले प्रभारी मंत्री केके बिश्नोई!

0
सिरोही के सरुपविलास में राजस्थान दिवस की सांस्कृतिक संध्या में मौजूद प्रभारी मंत्री और सांसद।

सबगुरु न्यूज-सिरोही। राजनीतिक गलियारों में चर्चा ये है कि प्रशासन ने राजस्थान दिवस के कार्यक्रम के कार्ड प्रभारी मंत्री को जबरदस्त नजरअंदाज क्या किया कि उनकी आत्मा कलेस गई। तीन महीने बाद उन्हें याद आया कि वो सिरोही के प्रभारी मंत्री हैं।

सिरोही के राजनीतिक हलकों में चुटकी ये ली जा रही है कि कार्ड से नाम और फोटो ओझल हुआ तो प्रभारी मंत्री को ये लगा कि सब इनका चेहरा नहीं भूल जाएं इसलिए वो चेहरा फिर से दिखाने आए हैं। उल्लेखनीय है राजस्थान दिवस के सांस्कृतिक कार्यक्रम के कार्ड में उनका और सांसद का नाम फोटो दोनों नहीं थे। जबकि ओटाराम देवासी का फोटो और नाम दोनों दे रखे थे। ऐसे में उस दौरान इसे राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई के रूप में देखा गया। मजेदार बात ये कि इस कार्यक्रम में जिनका फोटो था वो जनप्रतिनिधि गायब थे और जिनका नहीं था वो मौजूद।

– चर्चा ये भी

जिले के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा ये है कि सिरोही जिले में भाजपा नेताओं में अपनी पसंद के अधिकारी लगाने और उन्हें अपने हिसाब से इस्तेमाल करने की होड़ मची है। इस होड़ में शामिल नेताओं में सांसद, विधायक, जिलाध्यक्ष के साथ-साथ प्रभारी मंत्री के पास भी गाहे बगाहे अपना काम लेकर भाजपा नेता पहुंच जाते हैं। पार्टी सूत्रों की ही मानें तो सबसे ज्यादा मारामारी नवंबर में मची। वो भी एक पोस्ट के लिए। माउंट आबू के आयुक्त के पद के लिए। इस पर सभी नेता अपने अपने करीबियों को बैठाने की होड में थे।

पार्टी सूत्रों को मानें तो जिस दिन माउंट आबू के आयुक्त शिवपालसिंह को एपीओ किया तो कुछ नेता दूसरे दिन सुबह सुबह जयपुर में स्वायत्त शासन मंत्री के यहां पर दिख गए। उनका प्रयास था कि उन। करीबी भी वहां लग जाएं। लेकिन, किसी का दांव चल गया कोई रह गया। इसके बाद से जिले में प्रभारी मंत्री का आना जाना नहीं हुआ।

कांग्रेस शासन में जिले के नेता डर के मारे माउंट आबू के आयुक्त को लेकर हस्तक्षेप करने से बचते थे। वहां पर आयुक्त का पद लिंबडी कोठी को टारगेट में रखकर जयपुर से तय हो रहे थे। जो इसे तय कर रहे थे उनके सामने जिले के सभी कांग्रेस और कांग्रेस समर्थित नेताओं का कद इतना छोटा था कि उसमें हत्यक्षेप का मतलब उनके राजनीतिक करियर की तबाही थी। बात अलग है कि जयपुर के इन्हीं नेताजी को स्थानीय नेताओं ने लोकसभा चुनाव में ऐसी पटखनी दिलवाई कि उनके करियर में जोधपुर के बाद एक और असफलता जुड़ गई और भविष्य । लिए नजीर।

– दो वर्ष होने पर रथ को दिखाई थी हरी झंडी

केके बिश्नोई पर कांग्रेस यूं भी आरोप लगाती रही है कि वो जिले में सिर्फ औपचारिकता करने आते हैं। कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा भी कई बार आरोप लगा चुके हैं कि उनके कारण जिले के आम लोगों को समस्या निस्तारण में कोई लाभ नहीं मिल रहा है। इन आरोपों की वजह उनके सिरोही में आने के अंतराल से भी नजर आती है। राजस्थान सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर जिले में निकाले रथों को हरि झंडी दिखाने के तीन महीने बाद वो 19 मार्च एकाएक जिले में पुनरअवतरित हुए।

19 फरवरी को भजनलाल सरकार द्वारा पेश किए पूर्ण बजट के एक महीने बाद बजट को लेकर पत्रकार वार्ता की। उसमें भी वो पत्रकारों के सवालों को भटकाते हुए नाश्ता करके निकल लिए। फिर रात को राजस्थान दिवस के उस कार्यक्रम में शामिल हुए जिसके कार्ड में उनके फोटो तो क्या नाम तक नहीं था। कार्यक्रम का भी हाल यही था जैसे जंगल में मोर नाचा। ये शहर के एकदम कोने में स्थित सरूपविलास में आयोजित किया जहां शाम चार बजे के बाद तो वो लोग भी नजर आना कम हो जाता है जिनका कि वहां कार्यक्षेत्र है, तो आमजनता को वैसे भी कार्यालय समय के बाद वहां पहुंचने में कुछ खास रुचि नहीं रहती