सुनिश्चित हो सामाजिक सुरक्षा और पालनहार योजना का लाभ
अजमेर। दिव्यांगों के अंग उपकरण वितरण शिविर का गुरूवार को कलक्टर लोक बन्धु द्वारा अवलोकन कर कृत्रिम अंग एवं ट्राईसाइकिल वितरित की गई।
कलक्टर लोक बन्धु ने मानवीय दृष्टिकोण और पूर्ण संवेदनशीलता के साथ कार्य करते हुए जिले से आने वाले समस्त दिव्यांग आगंतुकों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन की प्राथमिकता समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को राहत पहुंचाना है।
कलक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि शिविर में आने वाले किसी भी दिव्यांगजन को नियमों की जानकारी के अभाव में परेशान नहीं होना पड़े। इसे सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना दिव्यांगजनों के आत्मनिर्भरता का एक बड़ा आधार है। इसलिए पात्र होने के बावजूद यदि किसी की पेंशन अटकी है या स्वीकृत नहीं हुई है, तो उसका तत्काल समाधान किया जाए।
कलक्टर ने विशेष जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक दिव्यांग व्यक्ति का यूडीआईडी कार्ड बना होना अनिवार्य है। यूडीआईडी कार्ड दिव्यांगता के प्रमाण पत्र से आगे बढ़कर दिव्यांग की पहचान है। यह देशभर में विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उन्होंने अधिकारियों को पाबंद किया कि वे विशेष अभियान चलाकर वंचित दिव्यांगों का चिह्वीकरण करें और यूडीआईडी कार्ड बनाने की प्रक्रिया को गति दें।
इसके साथ ही उन्होंने दिव्यांग व्यक्तियों के बच्चों को राज्य सरकार की महत्वकांक्षी पालनहार योजना से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि माता-पिता दिव्यांग हैं, तो उनके बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। शिविर में आने वाले ऎसे परिवारों के बच्चों को पालनहार योजना से लाभान्वित करने की कार्यवाही तत्काल प्रभाव से अमल में लाई जाए।
निरीक्षण के दौरान कलक्टर ने दिव्यांग व्यक्तियों के लिए बनाए जा रहे विशेष जयपुर फुट के निर्माण कार्य का भी गहनता से अवलोकन किया। उन्होंने कृत्रिम अंग निर्माण की बारीकियों को देखा और वहां मौजूद तकनीशियनों से जानकारी ली कि किस प्रकार यह कृत्रिम पैर दिव्यांगजनों की चलने-फिरने की क्षमता को पुनः लौटाने में सहायक साबित हो रहा है। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे जरूरतमंदों के लिए वरदान बताया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने श्रवण बाधित व्यक्तियों को प्रदान किए जाने वाले श्रवण यंत्र वितरण की कार्यवाही का भी जायजा लिया।
कलक्टर ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रवण यंत्र वितरण से पूर्व यह सुनिश्चित किया जाए कि मशीन संबंधित व्यक्ति की आवश्यकता के अनुरूप हो और उसे इस्तेमाल करने का तरीका भी लाभार्थी को सही ढंग से समझाया जाए। उन्होंने अंत में दोहराया कि दिव्यांगजनों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लक्ष्य यह होना चाहिए कि जिले का हर पात्र दिव्यांग सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ सके।
शिविर प्रभारी सुरेश मेहरा ने बताया कि तीन दिवसीय शिविर में 680 से अधिक अंग उपकरण वितरित कर दिव्यांगों को राहत प्रदान की गई। इनमें कृत्रिम पैर के 29, कृत्रिम हाथ के 5, कैलीपर के 71, ट्राईसाइकिल के 96, व्हीलचेयर के 120, बैशाखी के 39, अन्धछड़ी के 25, वॉकर के 19, बुजुर्ग छड़ी के 75, श्रवण यंत्र के 201 अंग उपकरण वितरित किए गए। भारत सरकार के श्रम कल्याण विभाग द्वारा 170 व्यक्तियों को रोजगार के लिए पंजीकृत किया गया। संस्थान के कार्मिकों एवं दिव्यांगों के लिए भामाशाह श्री भंवर सिंह पलाड़ा द्वारा भोजन एवं आवास की सुविधा उपलब्ध कराई गई।
इस अवसर पर जिला परिषद के लोकपाल सुरेश सिंधी, करण सिंह जोधा, शिविर प्रभारी सुरेश मेहरा, जुगल किशोर, पवन बैरवा, राजस्थान महिला कल्याण मण्डल चाचियावास, सीफार संस्था, राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम का सहयोग रहा।



