प्रादेशिक परिवहन व सड़क सुरक्षा विभाग को कम्प्यूटर सिस्टम से वादी का वाहन ब्लॉक मुक्त करने का आदेश

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खरीदी के 11 साल बाद बकाया टैक्स राशि वसूलने का नोटिस मिलने पर मालिक ने ली कोर्ट की शरण

अजमेर। सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट अजमेर जिला बबीता वर्मा ने ग्यारह साल पहले खरीदी कार का बकाया कर (टैक्स) वसूलने के नोटिस पर कार मालिक ममता जोशी का वाद आंशिक रूप से स्वीकार किया और प्रतिवादी प्रादेशिक परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग को आदेश दिया है कि वह वादी की कार को परिवहन विभाग के कम्प्यूटर सिस्टम से ब्लॉक मुक्त करे।

न्यायालय ने वादी श्रीमती जोशी को भी निर्देशित किया कि उक्त वाहन के संबंध में किसी तृतीय व्यक्ति का भार सुनिश्चित नहीं करें तथा वाहन का विक्रय हस्तांतरण नहीं करें। प्रकरण के अनुसार कचहरी रोड निवासी ममता जोशी पत्नी नरेश जोशी ने एडवोकेट विभोर गौड़ के जरिए प्रादेशिक परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग, राजस्थान सरकार जरिए कलेक्टर एवं मैसर्स अजमेर ऑटो एजेंसीज प्रा. लि. अजमेर के निदेशक के विरुद्ध वाद पेश किया।

उन्होंने अदालत को बताया कि उनकी कार का पंजीकरण अप्रार्थी प्रादेशिक परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग एवं राज्य सरकार से जरिए कलेक्टर द्वारा 28 अक्टूबर 2030 तक वैध है। उन्होंने उक्त वाहन एमबीसी से वर्ष 29 अक्टूबर 2015 को खरीदा था और उस समय का भुगतान कर चुकी है।

प्रादेशिक परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग ने करीब 11 साल बाद विक्रेता मैसर्स अजमेर ऑटो एजेंसीज प्रा. लि. अजमेर के निदेशक को नोटिस भेजा कि ऑडिट आपत्ति के आधार पर वादी के वाहन की कर राशि (टैक्स) 19 हजार 712 रुपए कम जमा कराई गई है, जिसे जुर्माना सहित जमा कराया जाए। इस बकाया राशि के कारण वाहन को विभाग के कम्प्यूटर सिस्टम में अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया गया। विभाग ने विक्रेता को दिए नोटिस की प्रति वादी को भी भेजी।

इस मामले में प्रतिवादी प्रादेशिक परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग, राजस्थान सरकार जरिए कलेक्टर ने अदालत को बताया कि वाहन विक्रेता मैसर्स अजमेर ऑटो एजेंसीज प्रा. लि. के निदेशक को एक बकाया (वन टाइम टैक्स) के 55 हजार 88 रुपए जमा कराने थे, किंतु उसने 35 हजार 776 रुपए ही जमा कराए। इसलिए शेष राशि 19 हजार 712 रुपए ब्याज सहित प्राप्त करने के वे अधिकारी हैं।

दोनों प्रतिवादियों ने यह भी बताया कि इस राशि को जमा कराने के संबंध में विक्रेता को अनेक बार पत्र देकर सूचित किया जा चुका है। न्यायालय ने कार मालिक जोशी का वाद आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए उपरोक्त आदेश दिया।