नियम-20 की छूट कागजों में सीमित
बाघसूरी/नसीराबाद/अजमेर। राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग में कार्यरत में संविदाकर्मियों, विशेषकर पंचायत शिक्षक और विद्यालय सहायकों के नियमितीकरण का मुद्दा एक बार फिर अधर में लटक गया है।
राज्य सरकार के लगातार करीब तीन-तीन बजट (2024, 2025 और 2026) में किए गए वादों के बावजूद अब तक एक भी संविदा कर्मचारी शिक्षक खासकर शिक्षा विभाग के शिक्षक वर्ग संविदाकर्मियों शिक्षकों का नियमितीकरण स्थायीकरण नहीं होने से कर्मचारियों में रोष बढ़ता जा रहा है।
संघ पदाधिकारियों के अनुसार Rajasthan Contractual Hiring to Civil Posts Rules, 2022 के नियम-20 में 5 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले संविदाकर्मियों के नियमितीकरण का प्रावधान है। सरकार द्वारा दी गई 2 वर्ष की छूट के बाद यह अवधि घटकर 3 वर्ष रह जाती है, लेकिन इसके बावजूद किसी भी शिक्षा विभाग में इस प्रावधान का लाभ जमीनी स्तर पर लागू नहीं हुआ।
नियमितीकरण की मांग तेज
पंचायत शिक्षक एवं विद्यालय सहायक संघ ने संविदाकर्मियों के नियमित/स्थायीकरण की मांग को लेकर आवाज तेज कर दी है। संविदाकर्मियों कर्मचारियों का कहना है कि बजट में अनुभव शिथिलता की घोषणा के बाद उम्मीद जगी थी, लेकिन अब तक कोई ठोस आदेश जारी नहीं हुआ।
हजारों कर्मचारी प्रभावित
संघ के अनुसार प्रदेश में लगभग 23,578 पंचायत शिक्षक व विद्यालय सहायक नियमितीकरण की प्रतीक्षा में हैं, जबकि कुल मिलाकर करीब 35,804 संविदा कर्मी इस मुद्दे से प्रभावित हैं।
वित्तीय सख्ती से बढ़ी चिंता
हाल ही में गेड पे लागू बिल आधारित भुगतान प्रणाली और संविदा खर्चों पर सख्ती ने कर्मचारियों की चिंता और बढ़ा दी है। कर्मचारियों को आशंका है कि इससे नियमितीकरण प्रक्रिया और प्रभावित हो सकती है। संघ ने पूर्व अनुभव को जोड़ते हुए 9, 18 और 27 वर्ष के आधार पर वेतन वृद्धि देने की मांग उठाई है।
बैठकों में जताया आक्रोश
उपखंण्ड क्षेत्र सहित विभिन्न स्थानों पर आयोजित बैठकों में संविदाकर्मियों शिक्षको कर्मचारियों ने सरकार के प्रति नाराजगी जताई और नियमितीकरण को प्रमुख मांग बताया।
आंदोलन की चेतावनी
संघ पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आदेश जारी नहीं किए गए तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। जयपुर में बड़े स्तर पर प्रदर्शन की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। संविदा कर्मियों का कहना है कि बजट घोषणाएं केवल कागजी राहत बनकर रह गई हैं और लगातार अनदेखी से उनका आक्रोश बढ़ता जा रहा है।



