चेन्नई। तमिलनाडु में चुनावों में अपने इतिहास में पहली बार तीसरे स्थान पर खिसकने और लगातार चुनावी हार का सामना करने के बाद, तमिलनाडु में मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक में टूट का सिलसिला जारी है। शनिवार को पार्टी के चार लोकप्रिय पूर्व मंत्रियों और कई पूर्व विधायकों ने अन्नाद्रमुक का साथ छोड़कर मुख्यमंत्री विजय की सत्ताधारी पार्टी टीवीके (तमिलगा वेत्री कषगम) का दामन थाम लिया।
टीवीके में शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं में पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता उडुमलाई के राधाकृष्णन, एमसी संपत, कड़म्बूर सी राजू और एनआर शिवपति शामिल हैं। इनमें से राधाकृष्णन, संपत और राजू ने क्रमशः उडुमलपेट, कुड्डालोर और कोविलपट्टी सीटों से हालिया विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन वे जीत नहीं पाए थे। इन सभी नेताओं ने पूर्वी तट मार्ग (ईसीआर) पर स्थित पनायुर उपनगर में टीवीके के मुख्य कार्यालय का दौरा किया। वहां उन्होंने टीवीके के महासचिव आनंद और चुनाव अभियान प्रबंधन महासचिव आधाव अर्जुना से मुलाकात की और पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इसके अलावा अन्नाद्रमुक के कई पूर्व विधायक भी टीवीके में शामिल हुए हैं, जिनमें सुंदरराज, राजमुथु, मनराज, राजावर्मन पन्नीरसेल्वम, एम मुरुगन और एन शिव शामिल हैं।
वरिष्ठ नेताओं का पार्टी छोड़ना अन्नाद्रमुक के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। पार्टी को लगातार मिल रही हार और विजय के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को रोकने के लिए अपनी धुर विरोधी पार्टी द्रमुक के सहयोग से सरकार बनाने की कथित कोशिशों के कारण वरिष्ठ नेता नेतृत्व से नाराज चल रहे थे। अन्नाद्रमुक के इतने बड़े चेहरों का टीवीके में शामिल होना मुख्यमंत्री विजय की पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और पूरे तमिलनाडु में अपना विस्तार करने में काफी मददगार साबित होगा।
चुनाव के बाद से ही अन्नाद्रमुक लगातार राजनीतिक संकटों से घिरी हुई है। इसकी शुरुआत तब हुई थी जब पार्टी के 47 विधायकों में से 25 विधायकों ने बगावत कर दी थी और पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए विश्वास मत (ट्रस्ट वोट) के दौरान मुख्यमंत्री विजय का समर्थन किया था। इसके बाद चार बागी विधायकों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और टीवीके में शामिल हो गए। हालांकि, बाद में पार्टी के भीतर के विरोधी गुटों ने आपसी मतभेद भुलाकर महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) के साथ फिर से हाथ मिला लिया था।
इसके बावजूद बागी खेमे का नेतृत्व करने वाले दो असंतुष्ट विधायक और पूर्व मंत्री सीवी षनमुगम तथा डॉक्टर सी विजयभास्कर अभी भी पलानीस्वामी से दूर बने हुए हैं और वे जल्द ही अपने अगले कदम का खुलासा कर सकते हैं। इन घटनाओं के बाद से अन्नाद्रमुक में मची यह भगदड़ पार्टी आलाकमान के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गई है, जो इस गिरावट को रोकने का रास्ता तलाशने में जुटे हैं।



