सेना दिवस परेड में भैरव बटालियन के रणबांकुरों ने पहली बार दिखाया अपना दम-खम

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जयपुर। आधुनिक युद्ध की जरूरतों को देखते हुए बनाई गयी सेना की नवगठित भैरव बटालियन ने पहली बार यहां सार्वजनिक रूप से 78 वें सेना दिवस परेड में अपने दम-खम की झलक दिखाई और परेड के दौरान यह आकर्षण का केन्द्र बनी रही।

सेना दिवस परेड का पहली बार सैन्य छावनी से बाहर जगतपुरा स्थित महल रोड पर आयोजन किया गया जिसमें पहली बार दो भैरव बटालियन (राजपूताना राइफल्स) और 4 भैरव बटालियन (सिख लाइट इन्फैंट्री) को प्रदर्शित किया गया जिससे सेना की बढती युद्धक क्षमताओं का पता चलता है। भगवान शिव के रौद्र और रक्षक स्वरूप भैरव के नाम पर गठित दो भैरव बटालियन सेना के ऑर्डर ऑफ बैटल में नवीनतम और सबसे प्रभावशाली इकाई हैं। इसका गठन पिछले वर्ष अगस्त में नई दिल्ली स्थित राजपूताना राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर में किया गया था। यह सतर्कता, शक्ति और त्वरित तथा निर्णायक कार्रवाई की प्रतीक है।
इस बटालियन के जवानों ने साइलेंट वॉच, डेडली स्ट्राइक के आदर्श वाक्य के साथ अपनी अद्वितीय तत्परता और घातक क्षमता का प्रदर्शन किया।

सेना की 4 भैरव बटालियन एक विशेष आक्रमणकारी इन्फैंट्री इकाई है, जो पारंपरिक पैदल सेना और विशेष बलों की क्षमताओं के बीच सेतु का कार्य करती है। त्वरित प्रतिक्रिया और उच्च तीव्रता वाले अभियानों के लिए डिज़ाइन की गई यह इकाई युद्धक्षेत्र में प्रथम प्रतिक्रिया बल के रूप में कार्य करती है। उन्नत निगरानी प्रणालियों, सटीक हथियारों और आधुनिक गतिशीलता से सुसज्जित यह इकाई कमांडरों की संचालन पहुंच को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाती है। सिख लाइट इन्फैंट्री की गौरवशाली परंपरा से जुड़ी यह बटालियन साहस, अनुशासन और तकनीक आधारित युद्ध कौशल का प्रतीक है।

तीव्र गति वाली युद्धक इकाई के रूप में भैरव बटालियन को आधुनिक, तकनीक-आधारित युद्ध की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए गठित किया गया है। इन्हें शांति और खुले संघर्ष के बीच के ग्रे ज़ोन में संचालन के लिए तैयार किया गया है। ये छोटी लेकिन घातक इकाई कोर और डिवीजन कमानों के अधीन कार्य करती हैं और राजस्थान, जम्मू, लद्दाख तथा पूर्वोत्तर सहित भारत की सबसे संवेदनशील सीमाओं पर तैनात की जाती हैं।

प्रत्येक भैरव बटालियन में लगभग 200 से 250 अत्यंत प्रशिक्षित सैनिक होते हैं। यह इकाई विशेष बलों की गति और सटीकता को नियमित पैदल सेना की स्थायित्व क्षमता के साथ जोड़ती है, जिससे कमांडरों को वास्तविक फाइट-टुनाइट क्षमता प्राप्त होती है। ड्रोन संचालन, इलेक्ट्रॉनिक व्यवधान, टोही और त्वरित प्रहार अभियानों के लिए सुसज्जित यह बटालियन हाइब्रिड युद्ध के लिए तैयार की गई है, जहां जमीनी सैनिक मानव रहित प्रणालियों और साइबर-इलेक्ट्रॉनिक साधनों के साथ समन्वय में कार्य करते हैं।

इससे पहले नई दिल्ली में आयोजित वार्षिक संवाददाता सम्मेलन के दौरान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया था कि अब तक 13 भैरव बटालियनों का गठन किया जा चुका है। नई इकाइयों के गठन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इन भैरव बटालियनों की भूमिका इन्फैंट्री बटालियनों के भीतर घातक प्लाटूनों और विशेष बलों के बीच की क्षमता के अंतर को पाटना है। इन्हें आधुनिक उपकरणों से लैस किया गया है, जिनमें मानव रहित विमान प्रणालियां, काउंटर-यूएएस उपकरण, पर्याप्त मात्रा में गोला-बारूद और अन्य संसाधन शामिल हैं, ताकि ये एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।