राजस्थान के भरतपुर निवासी छत्रपाल राजपूत से की थी शादी
मथुरा/भरतपुर। उत्तर प्रदेश के मथुरा की एक अदालत ने बहुचर्चित आयुषी यादव हत्याकांड में दोषी पाए गए पिता नितेश यादव और मां ब्रजवाला को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले को अत्यंत क्रूर और वीभत्स अपराध बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में नरमी बरतना न्याय के हित में नहीं होगा। अदालत ने पिता पर सात हजार रुपए और मां पर छह हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है।
अभियोजन के अनुसार दिल्ली के बदरपुर क्षेत्र की रहने वाली 22 वर्षीय आयुषी यादव बीसीए की छात्रा थी। उसने परिवार की इच्छा के विरुद्ध राजस्थान के भरतपुर निवासी छत्रपाल राजपूत से आर्य समाज मंदिर में विवाह कर लिया था। इसी बात को लेकर 17 नवंबर 2022 को परिवार में विवाद हुआ था।
विवाद के दौरान पिता नितेश यादव ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से आयुषी पर गोली चला दी। सीने में दो गोलियां लगने से उसकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से माता-पिता ने शव को पॉलीथीन में लपेटकर एक सूटकेस में रखा और 18 नवंबर की तड़के कार से मथुरा पहुंचे। वहां यमुना एक्सप्रेसवे के निकट एक सुनसान स्थान पर सूटकेस फेंककर लौट गए।
बाद में राहगीरों की सूचना पर पुलिस ने सूटकेस बरामद किया, जिसमें युवती का शव मिला। शव की पहचान और घटना के खुलासे के लिए पुलिस ने विशेष जांच अभियान चलाया। लगभग 100 पुलिसकर्मियों की 14 टीमों का गठन किया गया तथा करीब 300 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई।
जांच के दौरान मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस दिल्ली के बदरपुर स्थित परिवार के घर पहुंची। इसके बाद पोस्टमार्टम हाउस में शव की पहचान कराई गई और मामले की कड़ियां जुड़ती चली गईं। पुलिस ने साक्ष्यों और जांच के आधार पर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के बाद अदालत ने नितेश यादव और ब्रजवाला को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि बेटी की हत्या जैसा अपराध समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है और ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है, ताकि समाज में कानून के प्रति विश्वास बना रहे और गलत संदेश न जाए।



