भिण्ड न्यायालय ने नायब तहसीलदार की निगरानी याचिका की खारिज

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भिण्ड। मध्यप्रदेश के भिण्ड जिला न्यायालय के प्रथम अपर सत्र न्यायालय ने तत्कालीन नायब तहसीलदार मोहनलाल शर्मा सहित 4 आरोपियों की निगरानी याचिकाएं खारिज कर दीं। आरोपियों पर मुंबई बलात्कार मामले के आरोपी विमल यादव को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराने और सरकारी रिकॉर्ड में कथित हेरफेर करने का आरोप है। अदालत ने सातों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश को बरकरार रखा।

भिण्ड की अदालत ने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार करने और सरकारी रिकॉर्ड में कथित हेरफेर के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए थे। आदेश में तत्कालीन नायब तहसीलदार मोहनलाल शर्मा, पटवारी संजीव शर्मा, सचिव शेरसिंह यादव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रजनी जादौन, विमल यादव, आशुतोष सिंह यादव और राजकुमार दुबे के नाम शामिल हैं।

आरोप है कि विमल यादव को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराया गया। भिण्ड की न्यायिक दण्डाधिकारी (सीजेएम) अदालत ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं 336(2), 336(3), 340(1) और 340(2) के तहत मामला दर्ज करने के आदेश दिए थे।

सीजेएम अदालत के आदेश के बाद मोहनलाल शर्मा सहित चार आरोपियों ने प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश को चुनौती देते हुए प्रथम अपर सत्र न्यायालय में निगरानी याचिकाएं दायर की थीं। सोमवार को सुनवाई के बाद अदालत ने चारों याचिकाएं खारिज कर दीं। इससे आरोपियों को प्राथमिकी के आदेश से राहत नहीं मिल सकी।

अदालत के आदेश के बाद पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई करेगी। जांच के दौरान फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार करने की प्रक्रिया, सरकारी रिकॉर्ड में हुई कथित हेरफेर और इसमें संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाएगी। पुलिस यह भी जांच करेगी कि जन्म प्रमाण पत्र का इस्तेमाल मुंबई के बलात्कार मामले में आरोपी विमल यादव को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए किस तरह किया गया।

मौ में मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण, एक मेडिकल स्टोर बंद कराया

भिण्ड जिले के मौ में सोमवार को मेडिकल स्टोरों का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण की भनक लगते ही दो संचालक दुकानें बंद कर चले गए। तीन मेडिकल स्टोरों से छह दवाओं के सैंपल लिए गए। ड्रग इंस्पेक्टर डॉ. आकांक्षा गरुड़ ने टीम के साथ मेडिकल स्टोरों की जांच की।

टीम ने गौरी मंदाकिनी मेडिकल स्टोर, नवकर मेडिकल स्टोर, लक्ष्मी मेडिकल स्टोर, आदित्य मेडिकल स्टोर और अनमोल मेडिकल स्टोर का निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान राणा मेडिकल स्टोर और मुस्कान मेडिकल स्टोर के संचालकों को निरीक्षण की भनक लग गई और दोनों दुकानें बंद कर मौके से चले गए। औषधि विभाग ने दोनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई प्रस्तावित की है।

अनमोल मेडिकल स्टोर पर प्रोपराइटर एवं सक्षम व्यक्ति सुभाष कुशवाह नहीं मिले। उनकी जगह केदार कुशवाह दुकान पर मौजूद थे। विभाग ने मेडिकल स्टोर को बंद करा दिया। नवकर मेडिकल स्टोर, गौरी मंदाकिनी मेडिकल स्टोर और आदित्य मेडिकल स्टोर से छह दवाओं के सैंपल लिए गए। विभाग इन सैंपलों को भोपाल स्थित औषधि प्रयोगशाला भेजेगा, जहां इनकी जांच एवं परीक्षण किया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

औषधि निरीक्षक ने मेडिकल स्टोर संचालकों को निर्देश दिए कि पंजीकृत फार्मासिस्ट या सक्षम व्यक्ति की मौजूदगी में ही दुकान संचालित करें। नशे के लिए इस्तेमाल होने की संभावना वाली दवाओं का रिकॉर्ड रखना होगा तथा क्रय-विक्रय का रिकॉर्ड निरीक्षण के दौरान प्रस्तुत करना होगा।