जयपुर। राजस्थान भारतीय जनता पार्टी ने लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा नई दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देने, संसद की कार्यवाही बाधित करने तथा जंतर-मंतर पर हुए कथित पथराव के विरोध में बुधवार को जयपुर में प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया।
इसके लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के नेतृत्व में भाजपा प्रदेश कार्यालय से कांग्रेस प्रदेश कार्यालय की ओर विशाल पैदल मार्च निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिला, युवा, पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए राठौड़ ने कहा कि पेपर लीक के नाम पर विपक्ष द्वारा चलाया गया आंदोलन छात्रों का आंदोलन नहीं, बल्कि सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र था। अस्पतालों में भर्ती घायल लोगों की जानकारी लेने पर उनमें कोई भी छात्र नहीं मिला। कांग्रेस ने पथराव करने के लिए कश्मीर, बिहार से भाड़े के लोगों को बुलाया गया, ताकि संसद की कार्यवाही बाधित की जा सके।
इतना ही नहीं, आंदोलन में पाकिस्तान जिंदाबाद, अफजल के समर्थन में नारे, देश विरोधी नारे लगाये गये। धार्मिक स्थलों के विरोध में बोला गया। ऐसे में हम सभी को इस पूरे घटनाक्रम का सच जनता के सामने लाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जयपुर में आयोजित विरोध प्रदर्शन कांग्रेस नेतृत्व को लोकतांत्रिक मर्यादाओं का स्मरण कराने के लिए सांकेतिक रूप से आयोजित किया गया।उन्होंने कहा कि भाजपा संवाद और चर्चा के माध्यम से समाधान में विश्वास रखती है, जबकि कांग्रेस और विपक्ष छात्रों के मुद्दों का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग कर लोकतांत्रिक संस्थाओं को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं।
भाजपा संविधान, लोकतंत्र और संसदीय परंपराओं के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है तथा अराजक राजनीति का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देती रहेगी, जबकि प्रधानमंत्री आवास के बाहर नेता प्रतिपक्ष द्वारा धरना देना भारतीय संसदीय परंपराओं के विपरीत है और लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य है।
उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान मीडिया की महिला कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार, अश्लीलता की गयी, जिसकी भाजपा घोर निंदा करती है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक विरोध के नाम पर इस प्रकार की अशोभनीय घटनाएं किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकतीं।
राठौड़ ने कहा कि विपक्ष केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं, उसके पीछे भी कारण है, जब से प्रधान शिक्षा मंत्री बने, उन्होंने शिक्षा पद्धति में सुधार लाने का काम किया। हमारे महान व्यक्तित्व का सम्मान करने का काम किया। इस देश के महापुरुषों की जीवनी को पढ़ाने का काम किया। पहले हमारे देश में अकबर महान पढ़ाया जाता था, प्रधान ने नई शिक्षा नीति और शिक्षा व्यवस्था में भारतीय संस्कृति, इतिहास, महापुरुषों तथा लोकनायकों को उचित स्थान देने का कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, तेजाजी महाराज,गुरु गोविंद सिंह, देवनारायण को पढ़ाने का काम किया गया है। ऐसे में उनको लगता है कि यह तो शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन कर देंगे। यहां सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पैदा हो जाएगा। ऐसे में इसे हटाना बहुत जरूरी है और यह सोचकर विदेशों में धन एकत्रित किया गया। सच सबके सामने आ जाएगा। जांच हो रही है कि कहां से कितना पैसा मिला, कहां से पथराव करने वालों को लाया गया, यह सब सामने आ जाएगा। विपक्ष इसी कारण शिक्षा मंत्री को निशाना बना रहा है और उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहा है।
राठौड़ ने कहा कि भाजपा संवाद और चर्चा के माध्यम से समाधान में विश्वास रखती है, जबकि कांग्रेस और विपक्ष छात्रों के मुद्दों का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग कर लोकतांत्रिक संस्थाओं को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा संविधान, लोकतंत्र और संसदीय परंपराओं के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है तथा अराजक राजनीति का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देती रहेगी। संसद में चर्चा के लिए सरकार सदैव तैयार रही है, लेकिन विपक्ष ने संवाद के बजाय टकराव का रास्ता चुना। यह लोकतंत्र के प्रति उनकी असहिष्णु मानसिकता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सोचना चाहिए कि जब वह मुख्यमंत्री थे, तब 17 बार पेपरलीक हुआ, दो बार यूनिवर्सिटी के पेपर लीक हो गये। कुल मिलाकर जब 19 पेपरलीक हुए तो क्यों नहीं अशोक गहलोत ने इस्तीफा दिया। क्यों नहीं उस समय के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने त्यागपत्र दिया। अब किस मुंह से इस्तीफा मांग रहे हैं, उन्हें विचार करना चाहिए और एक बार अपनी गिरेबां में झांकर देखना चाहिए।





