नई दिल्ली। मंत्रिमंडल ने केरल राज्य का नाम बदलकर केरलम् करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में ‘सेवातीर्थ’ में मंत्रिमंडल की मंगलवार को हुई पहली बैठक में लिए गये निर्णयों की जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्चिनी वैष्णव ने संवाददाताओं को बताया कि भाषाई आधार पर राज्यों के गठन के बाद से ही केरल के नाम को बदलने की मांग की जा रही थी।
उन्होंने कहा कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति ‘केरल नाम परिवर्तन विधेयक, 2026’ के मसौदे को केरल विधानसभा की स्वीकृति के लिए भेजेंगी। संविधान के अनुच्छेद तीन के तहत राष्ट्रपति इस विधेयक पर केरल विधानसभा का मत प्राप्त करेंगी।
वैष्णव ने बताया कि राज्य विधानसभा की स्वीकृति के बाद केन्द्र सरकार इस पर आगे कार्रवाई करेगी और इस विधेयक को संसद में पारित कराने के लिए पेश किया जाएगा।
केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को केरल का नाम केरलम् करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसमें कहा गया था कि मलयालम भाषा में राज्य का नाम केरलम् है। एक नवंबर 1956 को राज्यों का गठन भाषायी आधार पर किया गया था। पहली नवंबर को केरल परिवार दिवस मनाया जाता है।
इस प्रस्ताव में कहा गया कि राष्ट्र के स्वाधीनता संग्राम के समय से ही मलयालम भाषी लोगों के लिए एक एकीकृत राज्य के गठन की मांग थी, लेकिन संविधान की पहली अनुसूची में हमारे राज्य का नाम केरल अंकित किया गया।
केरल विधानसभा के उक्त प्रस्ताव में कहा गया है कि यह सभा केन्द्र सरकार से सर्वसम्मति से आग्रह करती है कि वह संविधान के अनुच्छेद तीन के तहत केरल के नाम को केरलम् करने के लिए तत्काल कदम उठाये।
इसके बाद केरल सरकार ने केन्द्र सरकार से इस संबंध में कार्रवाई का अनुरोध किया था। इस पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय में विचार किया गया और प्रस्ताव को गृहमंत्री अमित शाह के अनुमोदन के बाद इस पर कैबिनेट के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया। इस प्रस्ताव पर कानून एवं न्याय मंत्रालय के कानूनी एवं विधायी विभाग की राय के बाद इसे मंत्रिमंडल के समक्ष लाया गया।



