नवाचार आधारित शिक्षण पर दिया जोर
फालना। एसपीयू (पीजी) महाविद्यालय फालना में ‘इनोवेटिव टीचिंग पेडागॉजी’ विषय पर आयोजित छह दिवसीय राष्ट्रीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का शनिवार को समापन हुआ। समापन समारोह में शिक्षा के बदलते स्वरूप, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), आधुनिक तकनीक और विद्यार्थी केंद्रित शिक्षण पद्धतियों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। कार्यक्रम में विभिन्न शिक्षण संस्थानों से जुड़े वक्ताओं और देश के अलग-अलग प्रदेशों के ऑनलाइन प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
समापन समारोह के दौरान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गौतम शर्मा ने छह दिवसीय एफडीपी की गतिविधियों और प्रमुख सत्रों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान शैक्षणिक परिवेश में शिक्षकों के लिए नवीन शिक्षण तकनीकों और प्रभावी पद्धतियों से परिचित होना आवश्यक है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों के ज्ञान, कौशल और कार्यक्षमता को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के अंग्रेजी विभाग की सहायक आचार्य एवं एनईपी समन्वयक डॉ. राजश्री राणावत ऑनलाइन मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को शिक्षण व्यवस्था में नवाचार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इसमें विद्यार्थियों के कौशल विकास, मूल्य संवर्धित शिक्षा और बहुविषयक अध्ययन को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने मल्टी डिसिप्लिनरी पेडागॉजी के माध्यम से विद्यार्थियों को विषयों की सीमाओं से आगे जाकर सीखने के अवसर उपलब्ध कराने पर भी प्रकाश डाला।
द्वितीय सत्र में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सेवानिवृत्त उप निदेशक सुलेमान टाक ने शिक्षण को अधिक प्रभावी और विद्यार्थी केंद्रित बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप आधुनिक तकनीकों को अपनाना चाहिए, लेकिन पारंपरिक शिक्षण व्यवस्थाओं की उपयोगिता को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आधुनिक तकनीक और पुराने अनुभवों के समन्वय से शिक्षा को अधिक सार्थक बनाया जा सकता है।
एसपीयू जैन शिक्षण संघ के सह सचिव अमित मेहता ने अपने विद्यार्थी जीवन के अनुभव साझा करते हुए शैक्षणिक क्षेत्र में आने वाली समस्याओं और उनके व्यावहारिक समाधान पर चर्चा की। वहीं, महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य एवं जैन शिक्षण संघ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुरेश चंद्र अग्रवाल ने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी के बीच द्विपक्षीय संवाद प्रभावी शिक्षण की बुनियाद है। विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से ही कक्षा शिक्षण को अधिक परिणामदायी बनाया जा सकता है।
समापन उद्बोधन में राजकीय महाविद्यालय बाली के प्राचार्य डॉ. आईदान सिंह राजपुरोहित ने कहा कि नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को केंद्र में रखकर शिक्षा को रोचक, सरल और व्यावहारिक बनाना है। वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ. ललित कुमार ने छह दिवसीय एफडीपी को उपयोगी अनुभव बताते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजन जारी रखने की आवश्यकता जताई।
इस अवसर पर डॉ. अंशुल शर्मा और मोहम्मद शकूर ने कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों को लेकर प्रतिभागियों का फीडबैक प्रस्तुत किया। आयोजन सचिव डॉ. युधिष्ठिर शर्मा ने एफडीपी का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि आगामी माह में महाविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन भी प्रस्तावित है। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता में योगदान देने वाले अतिथियों, वक्ताओं और संकाय सदस्यों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के संचालन और आयोजन व्यवस्था में सहायक आचार्य मोहम्मद यामीन, विनीश अरोड़ा, डॉ. ऋषि माथुर एवं दीपक गुप्ता का विशेष सहयोग रहा। समापन अवसर पर महाविद्यालय के संकाय सदस्य उपस्थित रहे तथा विभिन्न प्रदेशों से प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की।



