नई दिल्ली। पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित सभी अनुचित साधनों की रोकथाम से संबंधित ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक को राज्यसभा ने गुरुवार को विपक्ष के बहिर्गमन के बीच ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसके साथ ही इस विधेयक पर संसद की मुहर लग गई क्योंकि लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है।
सदन ने विधेयक के अलग-अलग प्रावधानों में संशोधन के विपक्ष के प्रस्तावों को ध्वनिमत से नामंजूर कर दिया। ये विधेयक एए रहीम, संदोष कुमार पी और जॉन ब्रिटास तथा अन्य सदस्यों ने दिए थे।
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने विधेयक पर करीब सात घंटे तक चली चर्चा का संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा कि यह सरकार के लिए बहुत गंभीर मामला है और सरकार इस समस्या से निपटने के लिए अपनी ओर से हर संभव कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों तथा अन्य लोगों के सभी तरह के सुझावों पर सकारात्मक रूख रखती है और आगे बढकर कदम उठाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं है और इसका दायरा बहुत व्यापक है जिससे यह सभी अनुचित साधनों के माध्यम से परीक्षा को प्रभावित करने पर भी अंकुश लगाएगा।
उन्होंने कहा कि विधेयक में जिस टास्क फोर्स के गठन की बात कही गई है वह सदस्यों के सभी सुझावों पर विचार करेगी। उनके जवाब के बाद सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया।
कार्मिक राज्य मंत्री ने विपक्ष के सदस्यों द्वारा देश में 152 पेपरों के लीक होने से संबंधित आंकड़े को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि यह आंकड़ा कहां से लिया गया है और यह सही नहीं है। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की निर्मम कार्रवाई के विपक्ष के आरोपों पर कहा कि इस कार्रवाई में कोई भी छात्र हताहत नहीं हुआ है। राज्यों के स्तर पर पेपर लीक होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल राष्ट्रीय परीक्षाओं तक ही सीमित समस्या नहीं है।
देश में बढती बेरोजगारी के विपक्ष के आरोपों पर उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में दस लाख से भी अधिक रोजगार दिये गये हैं और बैकलाग रिक्तियों को भरा गया है । उन्होंने कहा कि सरकार ने सभी लंबित पदोन्नति दे दी हैं और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों से अब देश में दो लाख से अधिक स्टार्टअप हैं और ये स्टार्टअप हर क्षेत्र में बनाये जा रहे हैं।
यह विधेयक लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) एक्ट, 2024 में संशोधन करता है। इस एक्ट का उद्देश्य निर्दिष्ट सार्वजनिक परीक्षा प्राधिकरणों द्वारा आयोजित परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकना है। इन प्राधिकरणों में संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड, बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी, केंद्र सरकार के मंत्रालय और उनसे जुड़े कार्यालय, और केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य प्राधिकरण शामिल हैं।
विधेयक में विभिन्न अपराधों के लिए कारावास की सज़ा और जुर्माने को बढाया गया है। विधेयक में अनुचित साधनों के प्रयोग पर तीन से पांच वर्ष तक के कारावास और दस लाख रुपए के जुर्माने को बढाकर 5 से 10 वर्ष तक का कारावास और 50 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सेवा प्रदाता पर भी न्यूनतम पांच वर्ष के कारावास और पांच करोड रुपए के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।



