पेपर लीक पर सख्त प्रावधानों वाला संशोधन विधेयक राज्य सभा में चर्चा के लिए पेश

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नई दिल्ली। सरकार ने पेपर लीक निवारण के लिए कानूनी व्यवस्था सख्त बनाने के प्रावधान वाले विधेयक को गुरुवार को राज्य सभा में पारित कराने के लिए पेश किया जिस पर चर्चा के लिए सात घंटे का समय तक किया गया है।

लोक सभा में बुधवार को पारित लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 विधेयक को कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मामलों के मंत्री जितेंद्र सिंह ने अपराह्न दो बजे पेश करते हुए इसे यथारूप पारित करने का आग्रह करते हुए कहा कि यह विधेयक देश के विद्यार्थियों के हित से जुडा है। उन्होंने कहा कि सदन इस विधेयक को उसी भावना से स्वीकार करे जिस भावना से इसे प्रस्तुत किया गया है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हवाले से कहा कि सरकार किसी को विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं करने देगी। सिंह ने सदन में कांग्रेसी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच कहा कि सरकार विधेयक पर सदस्यों के हर महत्वपूर्ण सुझाव पर गौर करने को तैयार है, वह किसी बात को प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बनाती, हम सुझावों का सम्मान करते हैं। यह विधेयक युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने की सरकार की प्रतिबद्धता का एक और प्रमाण है।

उन्होंने विपक्ष के शोर-गुल के बीच कहा कि पेपर लीक एक बुराई है, यह हर राज्य में दिखती रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने 2009 से अब तक केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों की भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों की लम्बी सूची गिनवायी, जिसमें इस साल पंजाब में फार्मासिस्टों की भर्ती तथा कर्नाटक में वेटरनरी अधिकारियों की परीक्षा में लीक के मामले भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के गठन का सुझाव एक सरकारी समिति ने 1992 में आया था, जबकि कांग्रेस की सरकार थी। उसके 33 साल बाद इस अधूरे काम को मोदी सरकार ने पूरा किया। उन्होंने कहा कि श्री मोदी का आभार है कि इस अधूरे काम को ईमानदारी से 2024 में पूरा किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार का इरादा साफ है।

सिंह ने प्रकारांतर से कहा कि 2014 पहले प्राइवेंट इंजीनियरिंग और मेडिकल संस्थाओं में मैनेजमेंट सीटों के चलते एनटीए को लटकाया गया। आज भी इसके विरोध में निहित स्वार्थ लगता है। सिंह ने यह भी कहा कि यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि सरकार ने परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने के लिए राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू नहीं किया। उन्होंने कहा कि समिति की 46 महत्वपूर्ण सिफारिशों में से 35 लागू की जा चुकी हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने के लिए प्रतिबद्ध है, 2024 के कानून में सजा और जुर्माना के प्रावधानों को सख्त बनाने के साथ इसमें विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन की व्यवस्था है। उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने काम करना शुरू कर दिया और इसके साथ ही मुंबई, मध्य प्रदेश, केरल और उत्तराखंड तथा बिहार में फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया जा चुका गया है।