भीलवाड़ा जिले में माता बांक्या रानी मंदिर को लेकर विवाद गहराया

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भीलवाड़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के बिजोलिया कस्बे में शुक्रवार को देवडूंगरी भीलपुरिया घाटी स्थित प्राचीन धार्मिक स्थल को लेकर विवाद गहरा गया।

सर्व समाज के आह्वान पर मंगलवार को मध्याह्न 12 बजे तक बाजार बंद रहा और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए उपखंड अधिकारी (एसडीएम) स्वाति झा को ज्ञापन सौंपकर सार्वजनिक धार्मिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने और माता बांक्या रानी मंदिर निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर करने की मांग की।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि देवडूंगरी भीलपुरिया घाटी स्थित यह धार्मिक स्थल प्राचीनकाल से सर्व समाज की आस्था का केंद्र रहा है। यहां भगवान देवनारायण मंदिर, हनुमानजी मंदिर, अन्य देवी-देवताओं के चबूतरे और माता बांक्या रानी का पवित्र स्थान मौजूद है। इन सभी धार्मिक स्थलों का निर्माण, विकास और जीर्णोद्धार वर्षों से जनसहयोग और सर्व समाज की भागीदारी से होता आया है।

ज्ञापन में कहा गया कि तत्कालीन राजपरिवार ने केवल पूजा-अर्चना की व्यवस्था के लिए सुर्तनिया परिवार को सेवायत (पुजारी) नियुक्त किया था। इससे मंदिर या उससे जुड़ी सार्वजनिक भूमि पर किसी प्रकार का स्वामित्व अथवा कब्जे का अधिकार प्राप्त नहीं होता।

ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोग सामूहिक विवाह सम्मेलन के नाम पर सार्वजनिक धार्मिक भूमि पर निजी अधिकार स्थापित करने और कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही माता बांक्या रानी मंदिर के निर्माण में भी अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। इससे सर्व समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं और भविष्य में कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है।

ग्रामीणों ने धार्मिक स्थल की राजस्व अभिलेखों के आधार पर निष्पक्ष जांच और सीमांकन कराने, मंदिर निर्माण विवाद की निष्पक्ष जांच करके नियमों के अनुरूप निर्माण की अनुमति देने और तथा अनावश्यक बाधा डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

उपखंड अधिकारी स्वाति झा ने बताया कि गुरुवार को ही दोनों पक्षों को बुलाकर समझाया गया था। दोनों ने शांति बनाए रखने का आश्वासन दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी नए निर्माण के लिए जिला कलेक्टर से अनुमति लेना अनिवार्य है। प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।