परिजनों ने मोबाइल फोन नहीं दिलाया, तो घर छोड़ भागी किशोरी

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फतेहाबाद/श्रीगंगानगर। मौजूदा डिजिटल दुनिया में स्मार्टफोन की ललक युवा मन को कितना प्रभावित कर सकती है, इसका एक जीता-जागता उदाहरण उस किशोरी की कहानी है, जो महज एक नए मोबाइल फोन की मांग पूरी न होने पर घर से भाग निकली।

हरियाणा के फतेहाबाद जिले की किशोरी अपनी उम्र के एक नाबालिग दोस्त के साथ इंटरसिटी ट्रेन से राजस्थान में श्रीगंगानगर पहुंच गई। इस घटना ने न केवल परिवारों को बच्चों की मनोदशा समझने की सीख दी, बल्कि पुलिस की तत्परता और बाल कल्याण प्रणाली की मजबूती को भी सामने लाया।

घटना की शुरुआत फतेहाबाद के एक मोहल्ले से हुई, जहां 14-15 वर्ष की यह बालिका अपने परिजनों से नया मोबाइल फोन मांग रही थी। परिजनों ने परिवार की आर्थिक स्थिति या अन्य कारणों से मांग को ठुकरा दिया, जिससे वह इतनी नाराज हो गयी और घर छोड़ने का फैसला कर लिया।

पुलिस ने बताया कि उसने अपने ही मोहल्ले में रहने वाले एक नाबालिग लड़के को साथ लिया, जो उसका दोस्त था। दोनों ने जाखल रेलवे स्टेशन से इंटरसिटी ट्रेन पकड़ी और बिना किसी योजना के श्रीगंगानगर की ओर रवाना हो गए। ट्रेन की यात्रा के दौरान वे किसी तरह की मुश्किल में नहीं पड़े, लेकिन उनका यही कदम परिवार के लिए चिंता का सबब बन गया।

परिजनों ने तुरंत फतेहाबाद के कोतवाली थाने में बालिका और बालक के लापता होने का मामला दर्ज कराया, जिसमें अपहरण की आशंका भी जताई गई। पुलिस ने उनकी तलाश की, लेकिन बच्चों का सुराग नहीं लग रहा था।

इधर, श्रीगंगानगर रेलवे स्टेशन पर पहुंचने पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने दोनों को संदिग्ध हालत में देखा। आरपीएफ के उपनिरीक्षक डूंगर सिंह के नेतृत्व में दल ने बच्चों से स्नेह से पूछताछ की तो बालिका ने खुलासा किया कि उसे नया मोबाइल फोन चाहिए था, लेकिन घरवालों ने मना कर दिया। इसलिए वह अपने दोस्त के साथ घर से निकल आई। वे ट्रेन में बैठकर यहां तक आ गए।

आरपीएफ ने तुरंत बच्चों के परिजनों से संपर्क किया और उन्हें सूचित किया कि दोनों बच्चे सुरक्षित हैं। श्रीगंगानगर में चाइल्ड हेल्पलाइन के समन्वयक त्रिलोक वर्मा ने बुधवार को इस संपूर्ण मामले की जानकारी देते बताया कि हेल्पलाइन दल ने बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया।

सुबह परिजन श्रीगंगानगर पहुंचे और आरपीएफ थाने में दस्तावेज पेश किसे। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष जोगेंद्र कौशिक की अध्यक्षता में हुई सुनवाई में बच्चों ने घर लौटने की इच्छा जताई। समिति के सदस्य डॉ. रामप्रकाश शर्मा और विपिन सांखला ने बच्चों की मानसिक स्थिति का आकलन किया और परिजनों को सौंपने का आदेश दिया।