अहमदाबाद। भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने 2026 टी20 विश्व कप की जीत को उनसे पहले कोच रहे राहुल द्रविड़ और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण को समर्पित किया है। इसके अलावा उन्होंने मुख्य चनयकर्ता अजीत अगरकर और बीसीसीआई के पूर्व सचिव जय शाह को भी धन्यवाद कहा है। .
अहमदाबाद में रविवार को न्यूज़ीलैंड को हराते हुए ख़िताब जीतने के बाद प्रेस कॉन्फ़्रेंस में गंभीर ने कहा कि मुझे लगता है कि सबसे पहले मुझे ये ट्रॉफ़ी राहुल भाई को समर्पित करनी चाहिए, और फिर वीवीएस लक्ष्मण भाई को भी, क्योंकि राहुल भाई ने अपने कार्यकाल में भारतीय टीम को इस परिस्थिति में रहने लायक बनाया और इसके लिए मुझे उन्हें धन्यवाद कहना चाहिए। लक्ष्मण बंद दरवाजे के पीछे निस्वार्थ भाव से भारतीय क्रिकेट के लिए काफ़ी कुछ कर रहे हैं क्योंकि सीओई भारतीय क्रिकेट की पाइपलाइन है। अजीत को भी धन्यवाद कहना चाहिए क्योंकि उनकी काफ़ी आलोचना होती है, लेकिन वह अपना काम पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं।
अंत में मैं जय (शाह) भाई को भी धन्यवाद कहूंगा क्योंकि जब मैं अपने कार्यकाल के सबसे बुरे दौर में था तो बहुत सारे लोगों को फोन मेरे पास नहीं आया था, चाहे वह न्यूज़ीलैंड सीरीज़ के बाद हो या फिर दक्षिण अफ़्रीका सीरीज के बाद जिस एक व्यक्ति का मुझे फोन आया वह जय भाई ही थे। इस काम के लिए मेरे ऊपर भरोसा जताने पर मैं उन्हें धन्यवाद कहूंगा क्योंकि मुझे अच्छे से याद है कि जब मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी तब मेरे पास किसी फ़्रेंचाइजी के साथ भी मुख्य कोच का अनुभव नहीं था। लेकिन फिर भी मेरे ऊपर भरोसा जताने पर मैं इन लोगों को धन्यवाद कहना चाहूंगा। मेरा मानना है कि जब तक वे लोग हैं भारतीय क्रिकेट सुरक्षित हाथों में है।
भले ही गंभीर को एक विजेता टीम मिली थी, लेकिन उन्होंने कप्तान सूर्यकुमार यादव के साथ मिलकर इसे एक निडर टीम में तब्दील कर दिया। गंभीर का कहना है कि यदि बड़े ईनाम हासिल करने हैं तो टीम को निडरता के साथ क्रिकेट खेलनी होगी।
पहली बात तो ये है कि खिलाड़ियों ने मुझे जिताया है। मैं लंबे समय से कहता आ रहा हूं कि आप उतने ही अच्छे कोच होते हैं जितने अच्छे आपके खिलाड़ी होते हैं। सारा क्रेडिट खिलाड़ियों को मिलना चाहिए, जिस पेशेवर तरीक़े से और ख़ास तौर से साहस के साथ उन्होंने ये टूर्नामेंट खेला। जैसा कि कप्तान कहते हैं कि हम द्विपक्षीय सीरीज़ और आईसीसी टूर्नामेंट्स दोनों में अलग-अलग तरह से खेलते थे। इस एक चीज को हम बदलना चाहते थे और मुझे भरोसा है कि सभी ने यह देखा। यदि आप सेमीफ़ाइनल और फ़ाइनल में 250 से अधिक रन बना देते हैं तो ये आपकी क्वालिटी के साथ ही साहस को भी दिखाता है जिससे आपने टूर्नामेंट खेला है।
टी20 फ़ॉर्मेट में सबसे अहम बात ये है कि हम हारने से डरते नहीं हैं। क्योंकि जब आप हारने से डरते हैं तो कभी जीत नहीं पाते। मेरा हमेशा मानना रहा है कि इस फ़ॉर्मेट में ‘हाई रिस्क हाई रिवार्ड’ सबसे अहम चीज़ है। यदि हम 110-120 पर आउट हो जाते तो भी मैं खुश रहता। लेकिन हमारा लक्ष्य हमेशा 250 रन बनाने का है। हम 160-170 वाली क्रिकेट नहीं खेलना चाहते हैं। मेरे हिसाब से हम लंबे समय तक वैसा खेल चुके हैं।
हम साउथ अफ़्रीका से 100 (76) रनों से हारे थे। लेकिन हमारी सोच कभी नहीं बदली। हमारा माइंडसेट वैसा ही रहा। हमने कभी नहीं सोचा कि हमें थोड़ा संभलकर खेलना चाहिए। जाहिर तौर पर यदि कप्तान और कोच दोनों का तालमेल नहीं होगा तो यह संभव नहीं है। कप्तान ख़ुद ‘हाई रिस्क, हाई रिवार्ड’ वाली क्रिकेट खेलना चाहते हैं। इसीलिए क्रेडिट कप्तान को भी दिया जाना चाहिए।
सेमीफ़ाइनल और फ़ाइनल दोनों में भारत ने 250 से अधिक का स्कोर बनाया। गंभीर का कहना है कि इतने बड़े टोटल बनाने के पीछे अहम चीज ये है कि इससे व्यक्तिगत उपलब्धियों से ध्यान हट जाता है फोकस टीम गोल पर चला जाता है।
उन्होंने कहा कि मेरी और सूर्या की साधारण सोच यही है कि उपलब्धियों से फ़र्क नहीं पड़ता। फ़र्क ट्रॉफ़ी से पड़ता है। भारतीय क्रिकेट में लंबे समय तक हमने उपलब्धियों की बात की है। मुझे उम्मीद है कि जब तक मैं यहां हूं हम उपलब्धियों के बारे में बात नहीं करेंगे।
आप पिछले मैचों को देखिए संजू ने क्या किया। 97 नाबाद, 89, 88। सोचिए यदि वह उपलब्धि के लिए खेल रहा होता तो हम शायद 250 तक नहीं पहुंच पाते। उपलब्धियों का जश्न मनाना बंद करिए और ट्राफ़ी का जश्न मनाइए। टीम स्पोर्ट में सबसे बड़ा लक्ष्य ट्रॉफ़ी जीतना होता है, व्यक्तिगत रन बनाने नहीं। मुझे इससे कभी फ़र्क नहीं पड़ा है और आगे भी नहीं पड़ेगा।



