पुष्कर में ब्रह्म सावित्री वेद विद्यापीठ के रजत जयंती समारोह का भव्य शुभारंभ

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दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े हुए शामिल
अजमेर। पुष्कर की पावन धरा पर स्थित ब्रह्म सावित्री वेद विद्यापीठ के तीन दिवसीय रजत जयंती समारोह एवं वार्षिक महाशिवरात्रि महोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार को अत्यंत भव्य वातावरण में हुआ। इस अवसर पर आयोजित दीक्षांत समारोह में माननीय राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। विद्यापीठ परिसर पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया तथा उन्होंने मृत्युंजय महादेव के दर्शन कर विधिवत पूजन अर्चन किया।

राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि वेद जीवन जीने का संविधान हैं। वे मानव को आदर्श आचरण, संयम और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि ऋषि-मुनियों की दिव्य अनुभूतियाँ वेद मंत्रों के रूप में अभिव्यक्त हुई हैं। इसे श्रुति परंपरा के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी संजोया गया। उन्होंने औपनिवेशिक शिक्षा पद्धति के कारण गुरुकुल व्यवस्था के खंडित होने का उल्लेख करते हुए कहा कि आज ऎसे संस्थान भारत की आत्मा को पुनः जागृत कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जब विश्व में विश्वविद्यालय की कल्पना भी नहीं थी तब भारत में तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविख्यात शिक्षाकेंद्र थे। यहां विदेशी शोधार्थी अध्ययन के लिए आते थे। उन्होंने कहा कि वैदिक पाठी यदि उच्च पदों पर आसीन हों तो समाज को सही दिशा मिलेगी और भारत पुनः विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठित होगा।

राष्ट्रीय संत स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज ने कहा कि पुष्कर तीर्थराज की भूमि पर यह आयोजन भारत की सनातन चेतना का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि विजय एकादशी के दिन दीप प्रज्वलन के साथ 36 वर्ष पूर्व इस प्रतिष्ठान की स्थापना की गई थी। उन्होंने कहा कि वेद जैसी कोई माँ नहीं है, वेद सर्वहिताय हैं और भारत की समस्त परंपराएं वेदों से ही आश्रित हैं। इंडियन नॉलेज सिस्टम का मूल भी वेदों में निहित है।

इस अवसर पर विद्यापीठ के अध्यक्ष आनंद राठी ने बताया कि यह आयोजन केवल उत्सव नहीं बल्कि वेदों के संरक्षण, संवर्धन एवं भावी पीढ़ी में संस्कार निर्माण का महाअभियान है। विद्यापीठ के सचिव संदीप झवर ने बताया कि यह संस्थान एक कमरे से प्रारंभ होकर आज विशाल स्वरूप में विकसित हुआ है। 22 दिवसीय घन पारायण में द्वादश वैदिक पारायणकर्ताओं ने निरंतर पाठ कर वेद परंपरा को जीवंत बनाए रखा।

दीक्षांत समारोह में 22 दिनों तक शुक्ल यजुर्वेद का घन पारायण करने वाले 12 घनपाठियों को सम्मानित किया गया। पारायण के निरीक्षण एवं मार्गदर्शन के लिए गुरु प्रशांत, विजय भालेराव एवं निखिल भालेराव का विशेष रूप से सम्मान किया गया। सभी घनपाठियों को सम्मान पत्र एवं पारितोषिक प्रदान किए गए।

इस अवसर पर संभागीय आयुक्त शक्ति सिंह राठौड़, पुलिस महानिरीक्षक राजेंद्र सिंह, कलक्टर लोकबंधु, पुलिस अधीक्षक वंदिता राणा सहित अन्य अधिकारी, संत, वैदिक विद्यार्थी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।