कोटा। श्रीराम मंदिर में धर्म एवं संस्कृति विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान में हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगले ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता का पठन, मनन, चिंतन से आगे जाकर हमें आचरण करना होगा। गीता हमें नामजप साधना के विषय में, स्वयं के भीतर का अहंकार और दोष निर्मूलन का संदेश देती है। उसे जीवन में उतरना यह वास्तविक सनातनी बनने का और जीवन सफल बनाने का मार्ग है।
श्रीराम मंदिर अध्यक्ष डॉ सुधीर उपाध्याय ने भी गीता का महत्व और गीता हर घर में क्यों आवश्यक है, इस पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भगवान ने हमें विवेक और कर्म की स्वतंत्रता दी है। इसका उपयोग कर हम हमारा उन्नति या पतन का कारण बन सकते हैं। विवेक जागृत होने के लिए गीता से हमें जुड़ना चाहिए।
अपने उदबोधन में सद्गुरु डॉ. पिंगले ने सनातन धर्म की वैज्ञानिकता, सोलह संस्कारों का महत्व, तथा धर्माचरण से होने वाले व्यक्तिगत व सामाजिक लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज में बढ़ती विकृतियों का मूल कारण संस्कारों से दूरी है। यदि विवाह, नामकरण, त्यौहार-उत्सव और जीवन के अन्य संस्कार शास्त्रीय दृष्टि से किए जाएं, तो परिवार और समाज दोनों सुदृढ़ बन सकते हैं।
इस अवसर पर श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं गीता परिवार के डॉ. सुधीर उपाध्याय, श्रीराम धर्मार्थसेवा समिति के उपाध्यक्ष प्रताप भान सिंह, सभापति महेश चंद्र वर्मा, श्रीराम मंदिर संध्याकाल महिला मंडल, हिन्दू जनजागृति समिति के राजस्थान-मध्यप्रदेश समन्वयक आनंद जाखोटिया, विष्णुकांत शर्मा, अर्चना लड्ढा सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी नागरिक उपस्थित रहे।



