रामझरोखा की फिजिकल फाइल नहीं चली तो निलंबन क्यों नहीं, फाइल गायब है तो एफआईआर क्यों नहीं?

सिरोही का रामझरोखा मंदिर जिसकी जमीनों को बचाने लिए इसकी ट्रस्ट की सलाहकार और प्रबंधन समिति ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया है।

सबगुरु न्यूज-सिरोही। कथित रूप से रामझरोखा मंदिर के पुराना खसरा नम्बर 2094 और नया खसरा नम्बर 2711 में नगर पालिका के द्वारा जारी किए 8 पट्टो निरस्ती के आदेश दे दिया हैं। कलेक्टर ने जिस जांच रिपोर्ट के आधार पर इन पट्टों निलंबन के आदेश दिए हैं उन्होंने उसी जांच रिपोर्ट में आई अनियमितताओं पर कार्रवाई नहीं की। जबकि जिला कलेक्टर खुद सिरोही नगर परिषद की प्रशासक हैं और ये झोलझाल उनके प्रशासक काल में ही हुआ है। तीन सदस्यीय जांच रिपोर्ट में एक महत्वपूर्व टिप्पणी की गई है, जिसके अनुसार रामझरोखा के 69 ए के पट्टों की ऑनलाइन डॉक्यूमेंट्स तो है लेकिन फिजिकल पत्रावली नहीं है। फाइल गायब है तो संबंधित सेक्शन एफआईआर और फाइल जमा किए बिना पट्टा निकाला गया तो निलंबन क्यों नहीं किया गया? जबकि खुद जिला कलेक्टर नगर परिषद की प्रशासक हैं। ये पूरी पत्रावली उनके प्रशासक काल में ही चली तो लापरवाही बरतने वाले कार्मिकों कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

– ऑनलाइन पत्रावली करनी भी जरूरी

सिरोही नगर परिषद में बोर्ड का कार्यकाल नवम्बर 2024 में ही खत्म हो गया था। राज्य सरकार ने सिरोही कलेक्टर को यहां का प्रशासक तभी नियुक्त कर दिया था। दस्तावेज बता रहे हैं कि रामझरोखयकी कथित जमीन के पट्टों की पत्रावली जुलाई 2025 से चली है। तब तक पट्टों पत्रावलियां ऑनलाइन चढ़नी शुरू हुई थी। पत्रावलियों की फिजिकल कॉपी भी नगर पालिका जमा करनी होती है। सारी रिपोर्ट्स नोटशीट इसी फिजिकल या ऑफलाइन फाइल होती है। इसके बाद ही पत्रावली को आगे बढ़ाते हुए इसके स्टेट्स को ऑनलाइन अपडेट किया जाता है। रामझरोखे की पत्रावली की यदि ऑफलाइन जांच समिति को नहीं मिली इसके दिन ही कारण हो सकते हैं।

वो ये कि सिरोही नगर परिषद नेने इसकी ऑफलाइन पत्रावली जमा ही नहीं की और बिना इंस्पेक्शन और नोटशीट के ही पत्रावली आगे बढ़ा दी। या इन पट्टों की भी ऑफलाइन पत्रावली नगर परिषद में जमा हुई थी, उसमें नोटिंग भी हुई थी लेकिन इस मामले में हुए गड़बड़ झाले से बचने के लिए स्कैम खुलते ही पत्रावली गायब कर दी गई। जिला कलेक्टर खुद ही नगर परिषद की प्रशासक हैं ऐसे में ऑफलाइन पत्रावली जमा नहीं करके पट्टा जारी करने वाले कार्मिकों को निलंबित किया जाना चाहिए या और यदि ऑफलाइन पत्रावली गायब की गई है तो संबंधित सेक्शन जिम्मेदार खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जानी चाहिए थी। लेकिन, अभी तक इस तरह की किसी कार्रवाई की सूचना नहीं आई है।

– बिना शपथ-पत्र व बंध-पत्र जारी किए पट्टे

जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि 69 ए के पट्टे जारी करने के लिए आवेदक का शपथ पर और बंध पत्र लगता है। जांच के दौरान पाया गया कि ये दोनों ही दस्तावेज नहीं लिए गए। इतना ही नहीं जांच रिपोर्ट में आवेदक के नाम की आपत्ति सूचना प्रक्रिया रिकॉर्ड में नहीं पाया गया। ऑफलाइन फाइल में 69 ए के पट्टों के लिए भूखंड की तकनीकी रिपोर्ट नहीं पाई गई।