रामझरोखा मंदिर के बाद हिंदुओं की ये जमीन बन सकती है ओटाराम देवासी के लिए नई समस्या!

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नेहरू उद्यान और हिंदुओं के श्मशान की लालबेरा की भूमि के बीच खाली पड़ी भूमि पैमाईश के बाद लालबेरा के खसरे का हिस्सा होने के बाद नेहरू उद्यान की बाउंड्री पर की गई कब्जा सुपुर्दगी।

सबगुरु न्यूज-सिरोही। सिरोही में हिंदुओं की धार्मिक और सामाजिक संस्थानों की जमीनों को बचाने के लिए भाजपा हिंदू वेव के कार्यकर्ता और भाजपा नेता हरीश दवे का संघर्ष रंग लाया। उनके द्वारा रामझरोखा मंदिर और लालबेरा हिंदू श्मशान की जमीन बचाने को लेकर किया गया आमरण अनशन और धरना अब अपने अंजाम तक पहुंचता नज़र आ रहा है। आमरण अनशन तुड़वाने के दौरान किए वायदे के अनुसार प्रशासन ने शनिवार को लाल बेरा की जमीन की पैमाईश की। इस पैमाईश में जो सामने आया वो पंचायतराज राज्य मंत्री और सिरोही के विधायक ओटाराम देवासी के लिए एक नई समस्या लेकर आएगा। हिंदू मंदिर रामझरोखे के मामले के बाद हिंदू श्मशान लालबेरा की भूमि के मामले में भी उनके विपक्ष के निशाने पर आने की आशंका बनने लगी है।

सेटेलाइट मैप में सिरोही से हिंदू श्मशान और नेहरू उद्यान बीच की वो भूमि जो पैमाईश में हिंदू श्मशान के खसरे का हिस्सा मिली।

हिन्दू वेव के हरीश दवे ने गत दिनों आमरण अनशन किया था। उनकी मांगो को लेकर दिए गए आश्वासन के बाद जिला प्रशाशन के निर्देश पर शनिवार को राजस्व विभाग की टीम ने तहसीलदार के निर्देश पर लालबेरा की पूरी भूमि की पैमाइश करवाई। गिरदावर बदाराम प्रजापत, सिरोही पटवारी भरत मीणा, सिरोही द्बितीय के पटवारी उदयवीर, पटवारी अशोक मेघवाल, जावाल आरआई भंवरलाल माली ने हिन्दू श्मशान सभा के अध्यक्ष धनपत सिंह राठौड़, भवानी सिंह, प्रवीण गोस्वामी, रामेश्वर कंसारा, हरीश दवे, मोहनलाल माली, रमेश सिंह राठौड़ के समक्ष खसरा संख्या 2691 से 2695 तक पूरी भूमि की पैमाइश की।

पैमाइश में जो मौका फर्द बनाई गई उसके अनुसार नेहरू पार्क के खसरा नंबर 2695 के पानी की टंकी की दीवार और लालबेरा के खसरा नम्बर 2694 की चार दिवारी के बीच की खाली पड़ी भूमि भी हिंदू श्मशान की लालबेरा के खसरा संख्या 2694 का ही हिस्सा है। खाली भूखंड नगर परिषद सिरोही के नेहरू गार्डन के खसरा संख्या 2695 का हिस्सा नहीं है। पैमाईश के बाद इस खाली पड़त भूमि पर हिंदू श्मशान से संस्थान लालबेरा की कमिटी सदस्यों की मौजूदगी में कब्जा सुपुर्दगी के दी। वहां पर संस्थान का बोर्ड लगा दिया।

अगर ये जमीन वही जमीन है जिसे राज्य मंत्री ओटाराम देवासी उनकी ही एक विचार संस्थान को आवंटित करवाई गई थी, तो रामझरोखा मंदिर के आदर्श शिक्षा समिति को दी 99 साल की लीज और भूखंडों के पट्टों की तरह ये भूमि भी विपक्ष को ओटाराम देवासी पर हिंदुओं की जमीनें खुर्द बुर्द करवाने का एक और मुद्दा हाथ में दे देगी। यहां विपक्ष की कमान संयम लोढ़ा के हाथ में है और इस भूमि के हिंदू श्मशान का हिस्सा होने से इस मुद्दे के आगे और ज्यादा गर्माने तथा ओटाराम देवासी और उनके कथित विचार संस्थान के लिए नई समस्या खड़ी होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।

सिरोही के व्हाट्स समूह में हरीश दवे की टिप्पणी के जवाब में भाजपा के निवर्तमान पार्षद प्रवीण राठौड़ के द्वारा की गई टिप्पणी यही बता रही है कि ये जमीन वही जमीन है जिसे ओटाराम देवासी के द्वारा आरएसएस के अन्य प्रकल्प सेवा भारती को आवंटित करवाने का दावा किया गया था। हिन्दू वेव के जिला संयोजक दवे ने बताया कि वर्ष 1955 में स्व गोकुल भाई भट्ट की प्रेरणा से भूतपूर्व विधायक धर्माराम आर्य ने सनातन धर्मियों के दाह संस्कार के बाद स्नानागार व अन्य धार्मिक क्रियाओं के लिए भूमि आवंटित करवाई थी। जिस पर भूमाफियाओं की नजर थी। किरायेदारों के पचड़े में मामला न्यायालय तक पहुचा व उसके आदेशो की पालना नही हुई। दवे ने बताया की लाल वेरा सनातन भूमि बचाने को लेकर 36 कौम की मांग को जन प्रतिनिधियों ने नजर अंदाज किया।

उन्होंने बताया कि गत 5 फरवरी को आमरण अनशन के बाद उपखंड अधिकारी हरीसिंह देवल ने इस गंभीर विषय पर निर्णय लेकर तहसीलदार को निर्देशित किया व गठित कमिटी ने पैमाइश व सीमाज्ञान बरसो से जटिल मसले पर हिन्दू श्मशान सभा के समक्ष स्थिति स्पष्ट की। पैमाईश में पड़त भूमि खसरा नम्बर 2694 का हिस्सा है और लाल वेरा की सम्पत्ति है। सोशल मीडिया पर ही हरीश दवे ने दावा किया कि शाम को निशानदेही को लेकर लगाई गई पत्थर की लाल पट्टियों की पत्थर गढ़ी को किसी ने निकाल दिया। इससे लोगों में नाराजगी व्याप्त हो गई।