अजमेर। भारत विकास परिषद महाराणा प्रताप शाखा द्वारा गुरुवार को भारतीय नववर्ष एवं राजस्थान दिवस बड़े ही उल्लास और पारंपरिक रंगों के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में संस्कृति, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का सुंदर संगम देखने को मिला। आयोजन स्थल पर सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल बना रहा, जहां बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लेकर नववर्ष का स्वागत किया।
संस्था के सचिव दीपक चोपड़ा ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक रीति-रिवाजों के साथ हवन पूजन से हुई। गायत्री परिवार के अभय मिश्रा एवं कुसुम मिश्रा ने हवन कुंड में विधिवत मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दिलवाईं, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भारत माता की सजीव झांकी रही, जिसमें यशिका अग्रवाल ने भारत माता का रूप धारण कर सभी का मन मोह लिया। इस अवसर पर मोहन खंडेलवाल ने उन्हें माला पहनाकर सम्मानित किया। साथ ही बैंड-बाजे की मधुर धुनों के बीच उपस्थित अतिथियों और नागरिकों का भव्य स्वागत किया गया।
राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में प्रतिभागियों ने पारंपरिक वेशभूषा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिससे कार्यक्रम में रंगारंग माहौल बन गया। परिषद के सदस्य केके अग्रवाल, नीरज कोठारी, लोकेश, चित्रेश, सुनील चौधरी, ओमप्रकाश देवानी, पंकज सोमानी, मुरारी तोषनीवाल, सुरेंद्र लखोटिया, कमल काबरा, डॉ. सुभाष महेश्वरी, डॉ. रजनीश सक्सेना, करण छाजेड़ सहित अनेक सदस्यों ने तिलक लगाकर और पुष्प वर्षा कर नागरिकों का अभिनंदन किया।
सिनेवर्ल्ड चौराहे और बीके कॉल नगर क्षेत्र में बैंड द्वारा देशभक्ति गीतों और पारंपरिक धुनों ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया। इस दौरान राहगीरों का ध्यान आकर्षित करते हुए भारतीय नववर्ष का भव्य स्वागत किया गया।
विशेष रूप से परिषद सदस्य सुरेश राठी का जन्मदिन भी इसी अवसर पर पारंपरिक तरीके से मनाया गया। उन्हें हवन कुंड में यजमान के रूप में बैठाकर विधि-विधान से आहुतियां दिलवाई गईं, जो सभी के लिए प्रेरणादायक रहा।
शाखा अध्यक्ष महेंद्र राका ने भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण किया, वहीं विनोद डीडवाणिया ने दीप प्रज्वलित कर नए वर्ष के स्वागत की शुरुआत की। जनप्रतिनिधि प्रतिभा पारेशर ने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है।
कार्यक्रम के अंत में परिषद ने अपने उद्देश्य को दोहराते हुए कहा कि सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार और समाज में जागरूकता फैलाना ही संस्था का मुख्य ध्येय है।



