नई दिल्ली। भारतीय रेल के इतिहास में जल्द ही एक नई और हरित क्रांति की शुरुआत होने जा रही है। इसे लेकर शुक्रवार को दिल्ली और हरियाणा के जींद के बीच हाइड्रोजन ट्रेन का अंतिम परीक्षण किया गया। यह ट्रेन न धुआं छोड़ेगी, न प्रदूषण फैलाएगी, बल्कि अपनी ताकत के सबूत में सिर्फ पानी की बौछारें करेगी।
रेलवे ने शुक्रवार को बताया कि हाइड्रोजन ट्रेन आज दिल्ली से हरियाणा में जींद के लिए रवाना हुई। इससे पहले हरियाणा में सोनीपत से जींद के बीच इस ट्रेन का परीक्षण किया गया था,जो आपातकालीन ब्रेकिंग दूरी और कंपन का परीक्षण था।
रेलवे के अनुसार दिल्ली से जींद के बीच इस ट्रेन का परीक्षा 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर किया गया। गौरतलब है कि इस ट्रेन में हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे ऑन-बोर्ड हाइड्रोजन गैस हवा की ऑक्सीजन के साथ मिलकर बिजली पैदा करती है और ट्रेन को चलाती है।
हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली यह ट्रेन सिर्फ जल-वाष्प छोड़ती है, जिससे यह जीरो-एमिशन वाला रेल समाधान बन जाती है। यह रेल परिवहन में साफ-सुथरे, स्मार्ट और ज्यादा टिकाऊ भविष्य का रास्ता तैयार करेगी। व्यावसायिक रूप से सेवा शुरू होने पर इसकी नियमित अधिकतम गति 75 किमी प्रति घंटा होगी।
इस स्वदेशी तकनीक के सफल विकास के साथ भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों (जैसे जर्मनी, चीन, जापान और अमेरिका) के समूह में शामिल हो जाएगा, जो हाइड्रोजन परिवहन का उपयोग कर रहे हैं। यह परियोजना भारतीय रेलवे के 2030 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मौजूदा समय में यह ब्रॉड गेज प्लेटफॉर्म पर चलने वाली दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन है। इस ट्रेन में कुल 10 कोच हैं, जिसमें आठ यात्री डिब्बे और 200 किलोवाट क्षमता वाली दो ड्राइविंग पावर कार (डीपीसी) शामिल हैं, जिससे इसकी कुल क्षमता 2400 किलोवाट हो जाती है।
इस ट्रेन के लिए हरियाणा के जींद में हाइड्रोजन उत्पादन और रीफ्यूलिंग संयंत्र स्थापित किया गया है, जो पानी से ग्रीन हाइड्रोजन तैयार करेगा। इस अत्याधुनिक ट्रेन के प्राथमिक रखरखाव का काम दिल्ली के शकूर बस्ती शेड में किया जाएगा।



