राहुल गांधी के बयान अहंकार और हताशा का नतीजा: सुधांशु त्रिवेदी

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भाजपा ने संसद में बहस की चुनौती पर उठाए सवाल
नई दिल्ली। पंजाब के संगरूर में कांग्रेस की ‘इंसाफ रैली’ के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर राहुल गांधी की तीखी टिप्पणियों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार किया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के बयानों को अहंकार और हताशा से प्रेरित बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को खुले मंच पर बहस की चुनौती देना और संसद में चर्चा से बचना संविधान की मूल भावना का अपमान है।

बुधवार को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए त्रिवेदी ने कहा कि यह देश और कांग्रेस दोनों का दुर्भाग्य है कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए राहुल गांधी पंजाब में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ बेबुनियाद तथा आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहे हैं।

नक्सलवाद पर सरकार के संकल्प का दिया उदाहरण

राहुल गांधी की ओर से पंजाब से नशे की समस्या खत्म करने के लिए केंद्र सरकार की समयसीमा पर सवाल उठाए जाने के जवाब में त्रिवेदी ने गृह मंत्री अमित शाह के नक्सलवाद उन्मूलन के संकल्प का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य रखा था और सरकार ने इस दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है।

त्रिवेदी ने दावा किया कि पिछले 12 महीनों में नक्सली हिंसा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का कोई जवान शहीद नहीं हुआ है। उनके मुताबिक, यह पिछले 47 वर्षों में पहली बार हुआ है। उन्होंने कहा कि किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए दृढ़ संकल्प और उसे पूरा करने की इच्छाशक्ति जरूरी होती है।

आतंकवाद और सरकारी कंपनियों का भी किया जिक्र

भाजपा प्रवक्ता ने राहुल गांधी के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2011 में उन्होंने आतंकवाद पर काबू पाने को लगभग असंभव बताया था, लेकिन आज देश में आतंकवादी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है। त्रिवेदी ने दावा किया कि दक्षिण कश्मीर के कुछ जिलों को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में आतंकवाद पर नियंत्रण स्थापित किया जा चुका है।

उन्होंने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी), भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) का उल्लेख करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने इन संस्थानों की स्थिति को लेकर पहले नकारात्मक टिप्पणियां की थीं, जबकि ये संस्थान अब रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज कर रहे हैं। भाजपा नेता ने इसे कांग्रेस के आरोपों और सरकार के प्रदर्शन के बीच अंतर बताते हुए पेश किया।

संसद को बताया बहस का सर्वोच्च मंच

राहुल गांधी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमने-सामने बैठकर बहस करने की चुनौती पर त्रिवेदी ने कहा कि भारत के संविधान निर्माताओं ने संसद को चर्चा और विमर्श का सर्वोच्च मंच माना था। ऐसे में विपक्ष के नेता को संसद के बाहर बहस की चुनौती देने के बजाय सदन में उपलब्ध लोकतांत्रिक मंच का उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी संसद में मुद्दों पर चर्चा करने से बचते हैं। त्रिवेदी ने वर्ष 2023 में सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के बोलना शुरू करने पर राहुल गांधी सदन से चले गए थे। उन्होंने मणिपुर के मुद्दे पर हुई चर्चा के दौरान भी राहुल गांधी के सदन से चले जाने का आरोप लगाया।

त्रिवेदी ने कहा कि सांसद केवल अपने निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं का ही नहीं, बल्कि देश के नागरिकों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में सदन में चर्चा से बचना उन लोगों के जनादेश और संसदीय लोकतंत्र की भावना का अनादर है।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

भाजपा ने राहुल गांधी की संगरूर रैली में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ दिए गए बयानों को राजनीतिक हताशा से जोड़ते हुए उनकी आलोचना की है। दूसरी ओर, राहुल गांधी ने रैली में प्रधानमंत्री को खुले मंच पर बहस की चुनौती दी थी और आरोप लगाया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रधानमंत्री मोदी पर प्रभाव है। उन्होंने संसद में अपनी बात नहीं रखने देने का आरोप भी लगाया था।

इस पूरे घटनाक्रम ने केंद्र की भाजपा सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है। पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में संगरूर की रैली और उसके बाद भाजपा की प्रतिक्रिया को दोनों दलों की चुनावी रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।