अजमेर में टोल प्लाजा और धर्मकांटों की जांच, बिना सत्यापन मिले तौल उपकरण; हजारों के चालान

2

बादनवाड़ा टोल प्लाजा पर एक टन के बाट और सत्यापन प्रमाणपत्र नहीं मिले, गेगल व पालरा के प्रतिष्ठान भी जांच के दायरे में
अजमेर। उपभोक्ताओं को सही तौल और माप के आधार पर सेवाएं व वस्तुएं उपलब्ध कराने के लिए विधिक माप विज्ञान विभाग ने अजमेर जिले में टोल प्लाजा, धर्मकांटों और स्टोन क्रेशर पर औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई स्थानों पर तौल उपकरणों का सत्यापन नहीं मिला। विभाग ने नियमानुसार चालान की कार्रवाई करते हुए संबंधित संचालकों को उपकरणों का सत्यापन कराने के निर्देश दिए।

विधिक माप विज्ञान की सहायक नियंत्रक भावना दयाल ने गुरुवार को बादनवाड़ा स्थित टोल प्लाजा का निरीक्षण किया। यहां जांच के दौरान एक टन क्षमता के बाट मौके पर उपलब्ध नहीं मिले। साथ ही सत्यापन प्रमाणपत्र भी प्रदर्शित नहीं पाए गए। इसे नियमों की पालना में कमी मानते हुए राजस्थान विधिक माप विज्ञान प्रवर्तन नियमों के तहत 3,000 रुपए का चालान बनाया गया।

वजन में अंतर मिलने पर दोबारा सत्यापन के निर्देश

निरीक्षण के दौरान स्टेटिक वेइंग मशीन का सत्यापन फरवरी 2027 तक वैध पाया गया, लेकिन वजन मापने में अंतर सामने आने पर विभाग ने इसे दोबारा सत्यापित कराने के लिए पाबंद किया। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि पुनः सत्यापन होने के बाद ही इसका इस्तेमाल किया जाए।

वहीं, टोल प्लाजा पर लगी स्वचालित वेइंग व्यवस्था के 22 कांटों का सत्यापन जून 2027 तक वैध मिला। जांच में इनका वजन माप निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया गया।

गेगल और पालरा में भी कार्रवाई

विभागीय टीम को गेगल स्थित अजमेर इंडस्ट्रीज एलएलपी में असत्यापित धर्मकांटा मिला। इस मामले में विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 के तहत 7,000 रुपए का जुर्माना जमा कराया गया।

पालरा क्षेत्र में भी निरीक्षण के दौरान अनियमितताएं सामने आईं। श्री भोलेनाथ स्टोन क्रेशर और शिवकृपा क्रेशर के खिलाफ 7,000-7,000 रुपए के चालान बनाए गए। वीर तेजा स्टोन क्रेशर का कोन क्रेशर भी असत्यापित मिला। विभाग ने संबंधित प्रतिष्ठानों को विधिक माप विज्ञान अधिनियम के प्रावधानों की पालना करने और तौल उपकरणों का नियमानुसार सत्यापन कराने के लिए पाबंद किया।

सही तौल सुनिश्चित करना अभियान का उद्देश्य

सहायक नियंत्रक भावना दयाल के अनुसार, औचक निरीक्षण अभियान का उद्देश्य टोल प्लाजा, धर्मकांटों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर इस्तेमाल होने वाले तौल उपकरणों की सटीकता सुनिश्चित करना है। वजन में गड़बड़ी या बिना सत्यापन उपकरणों के इस्तेमाल से व्यापारिक लेन-देन में उपभोक्ताओं को नुकसान हो सकता है।

विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 के तहत व्यापार में इस्तेमाल होने वाले बाट और माप उपकरणों का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सत्यापन कराना आवश्यक है। विभाग की ओर से प्रतिष्ठानों को नियमों की पालना के लिए पाबंद किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सही तौल व्यवस्था से व्यापार में पारदर्शिता बनी रहती है और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा होती है।