नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को युवाओं की लगन को विकसित भारत की बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि यदि मन में लगन हो, सामूहिक शक्ति पर टीम की तरह काम करने पर विश्वास हो, गिरकर फिर से उठ खड़े होने का साहस हो, तो कठिन-से-कठिन काम में भी सफलता जरूर मिलती है।
मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में एक वीडियो का जिक्र किया जिसमें विभिन्न टीमें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा आयोजित ड्रोन प्रतियोगिता में मंगल जैसी परिस्थितियों में ड्रोन उड़ानें का प्रयास कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि एक समय था जब बिना सैटेलाइट और जीपीएस सिस्टम के नाविक समंदर की लहरों का सामना करते हुए तय स्थान पर पहुंच जाते थे। अब समंदर से आगे बढ़कर दुनिया के देश अंतरिक्ष की अनंत ऊंचाई को नाप रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में जब नयी पीढ़ी के युवाओं की टीमें ड्रोन उड़ा रही थीं तो ड्रोन उड़ते थे, कुछ पल संतुलन में रहते थे, फिर अचानक जमीन पर गिर पड़ते थे। ड्रोन को अपने कैमरे और अपने ही अंदर के सॉफ्टवेयर के सहारे उड़ना था। उसे जमीन के पैटर्न पहचानने थे, ऊंचाई मापनी थी, बाधाएं समझनी थी, और खुद ही सुरक्षित उतरने का रास्ता ढूंढ़ना था।
इस प्रतियोगिता में पुणे के युवाओं की एक टीम ने कुछ हद तक सफलता पायी। उनका ड्रोन भी कई बार गिरा, क्रैश हुआ, पर उन्होंने हार नहीं मानी। कई बार के प्रयास के बाद इस टीम का ड्रोन मंगल ग्रह की परिस्थिति में कुछ देर उड़ने में कामयाब रहा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि चंद्रयान-2 के संपर्क से बाहर होने के बाद की क्षणिक निराशा से जिस प्रकार बाहर आकर देश के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 की सफलता की कहानी लिखी, कुछ वैसी ही चमक इस वीडियो में उन्हें युवाओं की आंखों में दिखायी दी।
मोदी ने कहा कि हर बार जब मैं हमारे युवाओं की लगन और वैज्ञानिकों के समर्पण को देखता हूं, तो मन उत्साह से भर जाता है। युवाओं की यही लगन, विकसित भारत की बहुत बड़ी शक्ति है।



