बिना कन्वर्जन के निर्माण पर जमीन हो जाएगी सरकार की, कइयों को मिले नोटिस

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परीक्षित मिश्रा-सिरोही। खेती की भूमि को बिना कन्वर्जन करवाए हुए यदि उसका आवासीय या व्यावसायिक इस्तेमाल किया तो वह जमीन सिरोही में सरकारी सिवाय चक भूमि हो जाएगी। सिरोही जिले के उपखण्ड अधिकारियों ने आबूरोड, रेवदर और पिण्डवाडा क्षेत्र में ऐसे कई लोगों को नोटिस जारी किए हैं, जिन्होंने बिना कन्वर्जन के भूमि का उपयोग परिवर्तन कर लिया। सिरोही और शिवगंज में ऐसे निर्माणों की संख्या काफी कम है।

ऐसा नहीं है कि यह प्रावधान नया है। राजस्थान टीनेंसी एक्ट की धारा 177 के तहत ऐसा प्रावधान पहले ही है, लेकिन प्रशासन इस पर कभी कार्रवाई नहीं करता। जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान तो होता ही साथ ही कई लोग अनजाने मंे ऐसी जगह पर आवासीय भवन का सपना बनाने के लिए निवेश कर देते हैं, जहां पर नियमों की पालना की गई है और न ही भविष्य में कोई सुविधा मिलने की संभावना है।
जिला प्रशासन ने पहल करते हुए तहसीलदारों द्वारा ऐसी सभी नाॅन-कन्वर्टेड भूमियों पर किए गए निर्माणों के लिए भूमि मालिक को नोटिस जारी किए हैं। इसके तहत उसे नियमानुसार शास्ति और कन्वर्जन शुल्क जमा करवाकर भूमि का कन्वर्जन करवाकर केस को ड्राप करवाना आवश्यक होगा अन्यथा वह जमीन सरकार की हो जाएगी।
-शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्र जद में
राजस्थान टीनेंसी एक्ट के तहत राजस्व विभाग के अधिकारी शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की सभी जमीनों पर इस तरह की कार्रवाई के लिए अधिकृत हैं। यह बात अलग है कि शहरी क्षेत्र की जमीनों पर बिना कन्वर्जन के निर्माण करने पर स्थानीय निकाय को संबंधित क्षेत्र के उपखण्ड अधिकारी कार्यालय में राजस्थान टीनेंसी एक्ट-1955 की धारा 177 के तहत वाद दर्ज करवाना होता है।

वैसे एक सामान्य नागरिक भी ऐसा मामला संज्ञान में आने पर ऐसा वाद उपखण्ड अधिकारी के न्यायालय में दर्ज करवा सकता है। ऐसी स्थिति राजस्व विभाग के प्रतिनिधि के रूप में तहसीलदार भी इस स्थिति में उपखण्ड अधिकारी न्यायालय में पैरवी में शामिल होता है।
-चार गुणा पेनेल्टी का प्रावधान
दरअसल राजस्थान टीनेंसी एक्ट-1955 के अनुसार राजस्थान में जमीनों के सभी मालिक दरअसल में राज्य सरकार के टीनेंट यानि कि किरायेदार हैं। ऐसे में जमीनों के उपयोग की स्थिति वह अपनी मर्जी से परिवर्तित नहीं कर सकता है। उसे इसके लिए राज्य सरकार को कन्वर्जन शुल्क के रूप में भूमि के उपयोग को परिवर्तित करवाने के लिए राशि देनी होगी।

इस मामले को ठीक उसी तरह से समझ सकते हैं जैसे किसी मकान या दुकान में कोई निर्माण या परिवर्तन करवाने के लिए मकान मालिक की अनुमति की आवश्यकता होती है ठीक उसी तरह से भूमि पर कोई कार्य करवाने के लिए राज्य सरकार की अनुमति की जरूरत होती है।

बिना कन्वर्जन के यदि कृषि भूमि का आवासीय या व्यावसायिक इस्तेमाल किया जाता है तो ऐसी स्थिति में राजस्थान टीनेंसी एक्ट की धारा 177 के तहत राजस्व अधिकारी को वाद दायर करने का अधिकार है। वाद दायर होने पर कन्वर्जन शुल्क के साथ चार गुणा पेनेल्टी देकर इसे ड्राॅप करवाया जा सकता है।
-नियमों के तहत निर्माण नहीं तो तोडना पड सकता है निर्माण
राजस्थान टीनेंसी एक्ट के तहत धारा 177 के नोटिस के बाद वाद चलने पर कन्वर्जन भी उसी निर्माण का होगा जो नियमानुसार होगा। इसमें सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट तथा राज्य सरकारों के द्वारा समय-समय पर बनाए नियमांे और आदेशों के तहत ही निर्माण किया जाना जरूरी है। अन्यथा नियमों के विपरीत किया गया निर्माण तोडना भी पड सकता है। वैसे आमतौर पर ऐसे मामलों में सरकार का मूल लक्ष्य शास्ति समेत कन्वर्जन लेना ही रहता है।
-इनका कहना है…
बिना कन्वर्जन शुल्क जमा करवाए भूमि का इस्तेमाल परिवर्तित करवाने वालों को राजस्थान टीनेंसी एक्ट की धारा 177 के तहत नोटिस जारी किए गए हैं। इसके तहत उन्हें यह पूछा गया है कि क्यों न बिना कन्वर्जन करवाए भूमि का भू-उपयोग परिवर्तन करने पर उनकी भूमि को सिवाय चक घोषित कर दिया जाए। शास्ति समेत कन्वर्जन शुल्क जमा करवाकर नियमों के तहत आने पर ऐसे लोग केस ड्राॅप करवा सकते हैं। इससे काफी राजस्व प्राप्ति की उम्मीद है।
संदेश नायक
जिला कलक्टर एव मजिस्ट्रेट, सिरोही।