48 दिव्यांग व निर्धन जोडों के जीवन में आई खुशियों की सौगात

सबगुरु न्यूज़ उदयपुर। खुशियों के बहुत ही खास और यादगार लम्हों ने जीवन के हर दर्द को भुला दिया। मन उमंगों से तरंगित हुआ तो पूरा वातावरण दिव्य हो गया। दिव्यांगता का दंश पीछे छूट गया, पिछली कडवी यादें अतीत में खो गईं और जीवन साथी के साथ कदम नवजीवन की राहों पर अग्रसर हो चले।

शाही इंतजामों के बीच लम्हों के दामन में नाते-रिश्तेदारों, दोस्तों ने स्नेह लुटाया, देशभर से आए धर्म माता-पिता के सान्निध्य ने अभिभूत और भावुक कर दिया। कई गणमान्यजनों की मौजूदगी ने आयोजन में चार-चांद लगा दिए।

 

हजारों लोगों की मौजूदगी के बीच यह अनूठा अवसर था नारायण सेवा संस्थान की ओर से लियों का गुड़ा बड़ी स्थित संस्थान के मुख्यालय पर रविवार को आयोजित हुए 29वें निःशुल्क सर्वधर्म दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह का। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए 48 जोडे़ सात जन्मों के बंधन में बंधे।

नारायण सेवा संस्थान के संस्थापक पद्मश्री कैलाश मानव, सह संस्थापिका कमलादेवी अग्रवाल, अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल, निदेशक वंदना अग्रवाल, ट्रस्टी देवेंद्र चौबीसा, जगदीश आर्य के सान्निध्य में हुए इस समारोह में आशीर्वाद, आशीर्वचन, आस्था और अपनेपन की अद्वितीय झलक देखने को मिली। जो भी साक्षी बना, भाव-विभोर हो गया।

मंगल घड़ियों में विवाह समारोह की शुरुआत हुई जिसमें दूल्हों ने नीम की डाली से तोरण की रस्म अदा की। इसके बाद विशाल पांडाल में हजारों लोगों की मौजूदगी में वरमाला एवं आशीर्वाद समारोह हुआ। शादी के जोड़़ों में खूब जंच रहे दूल्हा-दुल्हन ने बारी-बारी से एक-दूसरे को वरमाला पहना कर रिश्ते की डोर को अपनेपन से जोड़ दिया।

तालियों की गड़गड़ाहट, मंगल गीतों की शृंखला के बीच विशेष तौर पर बनाया गया हाइड्रोलिक मंच खास आकर्षण का केंद्र बना जिस पर दूल्हा-दुल्हन ने घूमते हुए मंच पर पुष्प वर्षा व आतिशबाजी के बीच वरमाला की रस्म अदा की।

भामाशाह कुसुम गुप्ता दिल्ली, शशि मुंबई, मुख्य अतिथि एकलिंगगढ़ छावनी के ब्रिगेडियर आर.आर पाटिल, परम विशिष्ट अतिथि महापौर चंद्रसिंह कोठारी, यूआईटी चेयरमैन रवीन्द्र श्रीमाली, हिरणमगरी थानाधिकारी संजीव स्वामी, समाजसेवी गणेश डागलिया का आशीर्वाद मिला।

दिव्यांग दूल्हा-दुल्हनों का खचाखच भरे डोम व उसके बाहर मौजूद हजारों लोगों ने बार-बार करतल ध्वनि से स्वागत किया। कोई दूल्हा दिव्यांग था, तो कोई दुल्हन। कोई कृत्रिम उपकरणों की मदद से वरमाला लिए आगे बढ़ा तो कोई जमीन पर हाथों व पैरों की मदद से चलते हुए, और कहीं कोई कोई व्हील चेयर पर। दिव्यांगता के बावजूद उनका अपार उत्साह देखते ही बना। शादी के गीतों पर पूरा पांडाल ही थिरक उठा। खूब बलाएं ली गईं, खूब दुआएं दी गईं।

इसके बाद विवाह स्थल पर तैयार वेदियों पर मुख्य आचार्य के मार्गदर्शन में विवाह की सभी रस्में विधि विधान के साथ संत समुदाय की मौजूदगी व धर्म माता-पिता के आशीर्वाद के बीच संपन्न हुईं। पाणिग्रहण संस्कार के बाद विवाह की अन्य रस्में हुईं। वर-वधुओं को आशीर्वाद प्रदान करने के लिए दिल्ली, मुंबई, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुड़गांव, जोधपुर, इंदौर, आगरा, नागपुर, हैदराबाद, अलीगढ़, पूना, राजकोट, देहरादून, पटना, बड़ौदा आदि शहरों से संस्थान के सहयोगी एवं अतिथिगण आए।

मंच पर विवाह की रस्मों के बीच कई दिव्यांगों को नारायण सेवा संस्थान की ओर से कृत्रिम उपकरण भी वितरित किए गए। इस दौरान जिन दिव्यांगों को कृत्रिम अंग लगाए गए, उन्होंने मंच पर अपनी आपबीती सुनाई व दिव्यांगता के दंश का वर्णन किया तो डोम में मौजूद हर किसी की आंखें छलछला आईं।

दिव्यांगों ने कहा कि नारायण सेवा संस्थान ने कृत्रिम अंग लगवा कर उन्हें नया जीवनदान दिया है। इस नई रोशनी ने उन्हें जीवन में कभी भी हार नहीं मानने का जो जज्बा दिया है, उसे वे उत्तरोत्तर आगे बढाते रहेंगे। दिव्यांगों को ट्राइसाइकिल, व्हील चेयर, नारायण मोड्यूलर आर्टीफिशियल लिम्ब, बैसाखी, कैलिपर, श्रवण यंत्र, ब्रेल स्टिक व अन्य उपकरण निःशुल्क प्रदान किए गए। यहां संस्थान की विकास यात्रा व दिव्यांगों के ऑपरेशनों की सफलता की कहानियों पर आधारित लघु वृत्तचित्र भी दिखाया गया।

बेटियों की विदाई में भर आई आंखें

शादी की खुशियों के बीच जब दिव्यांग बेटियों की विदाई की वेला आई तो सबकी आंखों से अपनेपन के आंसू छलक आए। दूल्हनों को डोली में बिठाया गया। परिजनों, मित्रों के साथ ही धर्म माता-पिता ने सदा खुश रहने के मंगल आशीष के साथ बेटियों को विदा किया। परिजनों ने नारायण सेवा संस्थान परिवार का आभार जताया।

नारायण सेवा संस्थान की ओर से सभी जोड़ों को उनके गांव, शहर में स्थित निवास स्थान तक छोड़ने के लिए विशेष बस, कारों व अन्य वाहनों की निःशुल्क व्यवस्था की गई। जोड़ों को गृहस्थी के लिए आवश्यक सामान के रूप में थाली, कटोरी, गिलास, स्टील की कोठी, बर्तन, कुकर, क्राॅकरी, सिलाई मशीन, डिनर सेट, गैस चूल्हा, कंबल, बेडशीट्स, तकिया, घड़ी, साड़ियां, पेंट-शर्ट, सोने का मंगलसूत्र, चांदी की पायल, बिछिया, अंगूठी सहित अन्य घरेलू उपहार सामग्री आदि प्रदान की गई। एक दिव्यांग बेरोजगार को स्वरोजगार के लिए सब्जियों से भरा हाथ ठेला भेंट किया गया।

मुख्यमंत्री ने भेजे बधाई संदेश

राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भव्य निःशुल्क सामूहिक विवाह समारोह के सभी जोड़ों के नाम सर्टिफिकेट व शुभकामना संदेश प्रेषित किया। मुख्यमंत्री ने नारायण सेवा संस्थान को उनके भागीरथ प्रयासों के लिए बधाई व साधुवाद दिया। साथ ही सभी जोड़ों के सुखमय जीवन की कामना की। महिला एवं बाल विकास विभाग की अधिकारी श्रीमती मंजू चैबीसा ने मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करते हुए नारायण सेवा संस्थान के संस्थापक पद्मश्री कैलाश मानव, अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल को बधाई संदेश वाले सर्टिफिकेट सौंपे।