
लखनऊ में छात्रा से गैंगरेप के बाद मारी गोली, हालत नाजुक

टाइटेनिक हादसे में बची महिला का फर कोट 230,000 डॉलर में बिका

लंदन। अपने समय के सबसे बड़े समुद्री हादसे का शिकार हुई टाइटेनिक के चालक दल में शामिल रहीं और हादसे में बच गईं महिला द्वारा हादसे के वक्त पहना गया फर कोट यहां नीलामी में 232,000 डॉलर में बिका।
डेरा हिंसा : हरियाणा पुलिस ने डेरा समिति के सदस्यों को तलब किया

चंडीगढ़। हरियाणा पुलिस ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को दुष्कर्म के मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद भड़की हिंसा के मामले में डेरा सच्चा सौदा समिति के 45 सदस्यों को 25 अगस्त को पेश होने को कहा है।
आईआरसीटीसी मामला : तेजस्वी यादव सीबीआई के समक्ष पेश

नई दिल्ली। राजद प्रमुख लालू प्रसाद के पुत्र तेजस्वी यादव 2006 के आईआरसीटीसी होटल मामले में चल रही जांच के सिलसिले में शुक्रवार को सीबीआई के समक्ष पेश हुए। सीबीआई के प्रवक्ता अभिषेक दयाल ने आईएएनएस को बताया कि तेजस्वी से यहां सीबीआई मुख्यालय में पूछताछ की गई।
बच्चों में बढ़ रही स्मार्टफोन की लत, करना पड़ेगा उनकी इस आदत का इलाज

हम सभी जानते हैं कि छोटे बच्चे बिना मोबाइल या टीवी देखे अपना दिन नहीं निकाल पाते हैं। दुनिया में तकनीक की लत इस हद तक बढ़ती जा रही है कि अब 13 साल तक के बच्चों को इससे मुक्ति दिलाने के लिए बकायदा इलाज करना पड़ रहा है। यहां एक उपचार केंद्र में स्मार्टफोन और वीडियो गेम का अत्यधिक इस्तेमाल करने के शिकार बच्चों का इलाज चल रहा है। स्काई न्यूज की रिपोर्ट में शुक्रवार को बताया गया कि सिएटल के नजदीक रिस्टार्ट लाइफ सेंटर पश्चिमी दुनिया में इस तरह के इलाज के लिए इकलौता केंद्र है जो किशोरों को डिजिटल तकनीक की लत से छुटकारा दिलाता है।

इस उपचार केंद्र में 13 से 18 साल तक के किशोरों का इलाज किया जाता है जिसका नाम सेरेनिटी माउंटेन है। रिस्टार्ट ने एक बयान में कहा, “अंतहीन आभासी प्रभाव से भरी इस दुनिया में हमारे निजी और पारिवारिक संबंध बिगड़ रहे हैं।”
केंद्र के संस्थापक डॉ. हिलारी कैश के हवाले से स्काई न्यूज ने बताया, “जब हम ऐसे डिवाइस बच्चों को देते हैं, तो वे डिवाइस से निकलने वाली आवाज और रोशनी के प्रति प्राकृतिक आवाज और रोशनी की तुलना में कहीं ज्यादा आकर्षित होते हैं। इसके कारण बच्चों की प्रकृति और समाज से जुड़ने की स्वाभाविकता खत्म हो जाती है।”
यह इलाज विभिन्न चरणों में किया जाता है। इनमें आमतौर से 8 से 12 हफ्तों का समय लगता है। वहीं, जिन्हें ज्यादा समय तक इलाज की जरूरत होती है उनका साल भर तक इलाज किया जाता है।