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नई दिल्ली :कमर दर्द की समस्या आजकल आम हो गई है. इसकी एक प्रमुख वजह, काम के दौरान ज्यादातर घंटे तक बैठे रहना है. इसके अलावा भारी वस्तु उठाने से कमर के निचले क्षेत्र की डिस्क खिसकने से भी कमर दर्द होने लगता है
ज्यादातर लोग कमर दर्द से बचाव के लिए तुरंत पेनकिलर खा लेते हैं जबकि, इससे बचना चाहिए. इसके अलावा, अगर आप बैठने के दौरान कुछ सावधानियां बरतते हैं तो आपको कमर दर्द से मुक्ति मिल सकती है. यहां आपको कुछ ऐसे टिप्स बताए जा रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप कमर दर्द की समस्या से निजात पा सकते हैं.
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था में धूम्रपान से बच्चे को दमा (अस्थमा) होने का खतरा हो सकता है। दूषित वातावरण के कारण यह बीमारी किशोरों, वयस्कों या अन्य लोगों को भी हो सकती है। व्यक्ति जहां रहता है यदि वहां का वातावरण धूल और गंदगी भरा हो तो दमा होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है।
विश्व दमा दिवस (2 मई) के अवसर पर जेपी हॉस्पिटल के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ज्ञानेंद्र अग्रवाल ने कहा, “घर की कुछ वस्तुएं जिनसे रोगी को एलर्जी होती हो या एलर्जी के अन्य कारक जैसे कॉकरोच, जानवरों के बालों की रूसी तथा फफूंद भी अस्थमा होने के कारण हो सकते हैं। कुछ विशिष्ट प्रकार के वायरस के कारण भी अस्थमा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि आनुवांशिक या अन्य वजह जैसे घर के पालतू जानवर, बाहर का वायु प्रदूषण, सुगंधित सौन्दर्य प्रसाधन, सर्दी, फ्लू, ब्रोंकाइटिस, साइनोसाइटिस का संक्रमण, धूम्रपान, व्यक्ति विशेष को कुछ विशेष खाद्य पदार्थों से एलर्जी, महिलाओं में हार्मोनल बदलाव एवं कुछ विशेष प्रकार की दवाएं भी अस्थमा का कारण बन सकती हैं।
डॉ. अग्रवाल ने कहा, “यह बीमारी किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है। जब किसी व्यक्ति के श्वसन के रास्ते में सूजन आ जाती है तो श्वसन मार्ग संकीर्ण हो जाता है और छाती में ऑक्सीजन उचित मात्रा में नहीं पहुंच पाती है। व्यक्ति की सांसें उखड़ने लगती है। रोग के कारण मरीज छोटी-छोटी सांसें लेता है और छाती में कसाव महसूस करता है। मरीज की सांसें फूलने लगती हैं और वह बार-बार खांसने लगता है।”
डॉ. ज्ञानेंद्र अग्रवाल ने बताया, “अगर सांस से संबंधित तकलीफ, सीने में जकड़न, सांसों में घरघराहट, सांस तेज लेते हुए पसीना आना, बेचैनी महसूस होना, सिर भारी होना, जोर-जोर से सांस लेने के कारण थकावट होना, उल्टी होना और खांसी होने जैसा महसूस हो, तो ये अस्थमा के लक्षण हो सकते हैं। इस बीमारी के कारण रोगी को बहुत अधिक खांसी होती है। खांसी द्वारा मरीज अपनी छाती के कफ को बाहर लाने की कोशिश करता है। अधिकांशत: अस्थमा सुबह व्यायाम के समय एवं रात में लोगों को परेशान करता है।”
दमा श्वसन तंत्र में लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है। इस बीमारी में व्यक्ति का सांस लेना मुश्किल हो जाता है। कई बार ऐसा देखा गया है कि अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति डॉक्टर के परामर्श से दवाई या इनहेलर तो ले लेते हैं लेकिन स्थिति में थोड़ा सुधार होते ही दवाई लेना छोड़ देते हैं। यह जोखिम भरा हो सकता है।
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