
मैमोरी कार्ड को बना सकते हैं आप फोन की इंटरनल मैमोरी, जानें कैसे

स्मार्टफोन यूज़र्स के साथ यह बेहद आम समस्या होती है ‘मैमोरी फुल’। हम में से कई इस समस्या को रोज फेस करते हैं। इन दिनों जहां स्मार्टफोन और फ्लैगशिप डिवाइस 64, या 128 जीबी इंटरनल स्टोरेज के साथ आते हैं, वहीं कुछ बजट स्मार्टफोन अब भी 8-16 जीबी स्टोरेज कैप के साथ आते हैं।
विनोद खन्ना को नहीं मिल सका वह मुकाम जिसके वे हकदार थे

मुंबई। अभिनय की शुरुआत खलनायक की भूमिकाओं से करने वाले विनोद खन्ना बाद में लोकप्रिय नायकों में शामिल हो गए और उनके अनगिनत प्रशंसक उनकी आकर्षक कद-काठी और रूप-रंग पर फिदा रहे। एक समय अदाकारी छोड़कर अध्यात्म की दुनिया में चले गए इस अभिनेता ने बाद में फिर अभिनय का दामन थामा लेकिन शायद फिल्मी दुनिया में वह मुकाम हासिल नहीं कर सके, जिसके हकदार थे।
हालांकि विनोद ने करीब पांच दशक तक अपने अभिनय, अंदाज, हाव-भाव और चाल-ढाल से हिंदी फिल्म जगत में अपना दबदबा रखा और चाहने वालों को लुभाते रहे। इसके साथ 1997 में उन्होंने सियासत की सक्रिय पारी भी शुरू की, जो अंतिम समय तक सांसद के रूप में जारी रही। विनोद खन्ना का आज 70 साल की उम्र में मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया। अस्पताल ने बयान जारी कर बताया कि उन्हें ब्लैडर कैंसर था। उनके निधन की खबर सुनकर बॉलीवुड के साथ उनके प्रशंसकों को भी गहरा धक्का लगा।
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खन्ना ने कई फिल्मों में अमिताभ बच्चन के साथ काम किया। इस जोड़ी को अधिकतर फिल्मों में कामयाबी मिली लेकिन एंग्री यंग मैन के रूप में मशहूर हो गए बच्चन को विनोद के मुकाबले इन फिल्मों की कामयाबी का ज्यादा श्रेय मिला। दोनों ने ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘परवरिश’, ‘रेशमा और शेरा’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘जमीर’, ‘हेरा फेरी’ और ‘खून पसीना’ में साथ काम किया था और दोनों के बीच होड़ में हमेशा बच्चन ही निर्विवाद नायक रहे, जहां विनोद खन्ना को दूसरे नंबर पर देखा जाता था।

विनोद खन्ना ने करियर की शुरुआत भी सहायक किरदार निभाकर की थी। उन्हें पहला ब्रेक दिया था सुनील दत्त ने जो खुद भी बाद में पंजाब से सांसद रहे। सुनील दत्त ले कहीं विनोद खन्ना को देखा और उनके आकर्षक अंदाज से इस कदर प्रभावित हुए कि 1968 में अपनी होम प्रोडक्शन फिल्म ‘मन का मीत’ में खलनायक की भूमिका के लिए उन्हें चुना। शुरुआती सालों में वह ‘पूरब और पश्चिम’, ‘आन मिलो सजना’, ‘सच्चा झूठा’ और ‘मेरा गांव मेरा देश’ जैसी फिल्मों में खलनायक और सहायक किरदार अदा करते रहे।
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नायक के रूप में पहला ब्रेक उन्हें ‘हम तुम और वो’ (1971) से मिला. इसके बाद सिलसिलेवार कई फिल्में उनके खाते में जुड़ती चली गयीं, जिनसे उन्हें हीरो के तौर पर पहचान मिली। खन्ना ने 1982 में तब अपने प्रशंसकों को सकते में डाल दिया, जब चरम लोकप्रियता के दौर में वह बॉलीवुड को छोड़कर अध्यात्म की ओर चले गये और अमेरिका के ओरेगोन में ओशो रजनीश के पास पहुंच गए।

वह अपनी पहली पत्नी गीतांजलि और दोनों बेटों अक्षय तथा राहुल को छोड़कर रजनीश की शरण में चले गए। 1985 में गीताजंलि से उनका तलाक हो गया। अक्षय और राहुल दोनों अभिनेता हैं। अध्यात्म की दुनिया में पांच साल रहने के बाद वह फिर सिनेमा की ओर लौटे और फिल्मी दुनिया में अपनी पुरानी शोहरत पाने में उन्हें ज्यादा वक्त नहीं लगा। 80 के दशक में आईं उनकी फिल्मों में ‘इंसाफ‘, ‘दयावान’ और ‘चांदनी’ आदि रहीं। 1990 में उन्होंने कविता से दूसरी शादी कर ली जिनसे उनका एक बेटा साक्षी और बेटी श्रद्धा हैं।
साल 1946 में पेशावर में कपड़ा कारोबारी पंजाबी परिवार में जन्मे विनोद खन्ना ने 1997 में जब राजनीतिक सफर की शुरुआत की तो उन्होंने पंजाब को ही चुना। भाजपा में शामिल होकर उन्होंने 1998 में गुरदासपुर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा और संसद में पहुंचे। उसके बाद वह केवल 2009 में इस सीट से हारे लेकिन 2014 में फिर से जीत हासिल की।
साल 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें अपना संस्कृति और पर्यटन मंत्री बनाया। बाद में उन्हें विदेश राज्य मंत्री का प्रभार दिया गया। खन्ना अपने आखिरी समय तक बॉलीवुड में सक्रिय रहे। कुछ साल पहले वह सलमान खान की ‘दबंग’ और 2015 में शाहरूख खान अभिनीत ‘दिलवाले’ में पर्दे पर दिखाई दिए।
तमन्ना भाटिया ने कहा मैं ‘बाहुबली 2’ के क्लाइमैक्स में हूं

मुंबई: ‘बाहुबली 2’ फिल्म की रिलीज को लेकर लोगों के मन में काफी उत्सुकता है और हर कोई इस फिल्म को देखने का इच्छुक है। फिल्म के सभी कैरेक्टर एक से बढ़कर एक हैं फिल्म में अहम किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया को लेकर कहा जा रहा है कि ‘बाहुबली 2’ में उनका किरदार कैसा है और वो इसे लेकर कैसा महसूस कर रही हैं इन सभी बातों पर एक मीडिया हाउस से बात करते तमन्ना ने कई सवालों के जबाब दिए।
तमन्ना भाटिया से पूछा गया कि फिल्म के ट्रेलर में वो मिसिंग थीं तो तमन्ना ने कहा कि मेरा रोल फिल्म में अहम है और ये कोई मायने नहीं रखता, पहले पार्ट में भी ऐसा था फिल्म में मेरा किरदार काफी अच्छा है।
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मेरा रोल काफी महत्वपूर्ण है
तमन्ना बताती हैं कि मेरा रोल ‘बाहुबली 2’ फिल्म के क्लाइमेक्स में है, वैसे पूरी फिल्म में मेरा रोल काफी महत्वपूर्ण है जो दर्शकों को पसंद आएगा।
विनोद खन्ना के निधन के बाद ‘बाहुबली 2’ का प्रीमियर रद्द
तमन्ना भाटिया से जब पूछा गया कि कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा तो वो बोलीं कि पहले पार्ट की रिलीज़ के एक दिन पहले ही मुझे भी इसका जवाब मिला था और हम सबको पता था कि कुछ ऐसा ही होगा।
लेकिन हमें ये नहीं पता था कि ये सवाल इतना फेमस हो जाएगा. मैं उन चंद लोगों में से हूं जिसे इस सवाल का जवाब पता है जो कि मैं दूंगी नहीं।
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