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मैच में कश्यप ने खासा संघर्ष किया और दूसरे गेम में बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया। तीसरे गेम में भी उन्होंने काफी संघर्ष किया। लेकिन बाजी अंतत राउल के हाथ लगी।
नई दिल्ली। सप्ताह के तीसरे दिन बुधवार को भारतीय शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ खुला। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 28.86 अंको की कमजोरी के साथ 28,022.02 के स्तर पर और निफ्टी 1.80 अंको की तेजी के साथ 8,670.70 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
सेक्टोरियल इंडेक्स की बात करें तो सबसे ज्यादा तेजी मेटल (0.06 फीसदी), फार्मा (0.57 फीसदी) और रियल्टी (0.19 फीसदी) में देखने को मिल रही है। दूसरी ओर गिरावट निफ्टी बैंक (0.27 फीसदी), ऑटो (0.41 फीसदी), फाइनेंशियल सर्विस (0.28 फीसदी), एफएमसीजी (0.42 फीसदी), पीएसयू बैंक (0.25 फीसदी) और प्राइवेट बैंक (0.21 फीसदी) में हुई है। वहीं, मिडकैप (0.09 फीसदी) की गिरावट और स्मॉलकैप (0.26 फीसदी) की तेजी के साथ कारोबार कर रहे है।
निफ्टी में शुमार शेयर्स में 29 शेयर हरे निशान में और 22 गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। दिग्गज शेयर्स की बात करें तो भेल (4.92 फीसदी), विप्रो (1.67 फीसदी), बीपीसीएल (1.58 फीसदी), सनफार्मा (1.41 फीसदी) और लूपिन (1.17 फीसदी) के शेयर्स में हुई है। वहीं, गिरावट टाटामोटर्स डीवीआर (1.03 फीसदी), आईटीसी (0.87 फीसदी), आईसीआईसीआई बैंक (0.85 फीसदी), हिंदयूनिलिवर (0.82 फीसदी) और टाटामोटर्स (0.71 फीसदी) के शेयर्स में हुई है।
रुपया हुआ मजबूत
बुधवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 4 पैसे की मजबूती के साथ 66.68 पर खुला है। जबकि, मंगलावर के सत्र में एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 17 पैसे मजबूत होकर 66.72 के स्तर पर बंद हुआ था।
Saudi prince convicted of murder sentenced to death
रियाद। सऊदी अरब में हत्या के दोष में शाही खानदान के एक व्यक्ति को मौत की सजा दी गई है। यह एक दुर्लभ घटना है, जिसमें हाउस ऑफ सऊद के हजारों सदस्यों में से किसी एक को मौत की सजा दी गई है।
देश के गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि प्रिंस तुर्की बिन सऊद अल-कबीर को राजधानी रियाद में मौत की सजा दी गई। अल-कबीर पर सऊदी नागरिक आदिल अल-मोहम्मद की गोली मारकर हत्या करने का आरोप था।
मंत्रालय के बयानों के आधार पर एएफपी की गिनती के मुताबिक, कबीर 134वें स्थानीय या विदेशी थे, जिन्हें इस साल मौत की सजा दी गई।
Narasimha doping case registered by CBI in the case
नई दिल्ली। CBI ने रियो ओलंपिक में भारतीय दल का हिस्सा रहे पहलवान नरसिंह यादव के खाने में प्रतिबंधित ड्रग्स मिलाये जाने के मामले में मंगलवार को मामला दर्ज कर लिया।
सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि जांच एजेंसी ने नरसिंह यादव से जुड़े डोप मामले की जांच का जिम्मा हरियाणा पुलिस से अपने हाथों में ले लिया। हरियाणा पुलिस ने सोनीपत के राई थाने में इस संबंध में एक प्राथमिकी दर्ज की थी, लेकिन जांच एजेंसी ने साजिश की जांच का जिम्मा अपने हाथ में लेने के बाद अलग से मामला दर्ज किया।
पहलवान नरसिंह अगस्त में हुए रियो ओलंपिक खेलों में भारतीय दल का हिस्सा थे लेकिन उनके मुकाबले से पूर्व ही खेल पंचाट (कैस) ने उनपर प्रतिबंध लगा दिया था। नरसिंह ने इस पूरे मामले को लेकर साजिश का आरोप लगाया था और सीबीआई से मामले की जांच कराने की मांग की थी।
सीबीआई ने ये केस हरियाणा सरकार के आग्रह तथा तत्पश्चात केन्द्र सरकार की अधिसूचना के आधार पर दर्ज किया है। नरसिंह और भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने इस पूरे घटनाक्रम को साजिश बताते हुए सीबीआई से मामले की जांच की मांग की थी। उन्होंने कहा कि यह सब नरसिंह को रियो से रोकने और उनकी छवि खराब करने के इरादे से किया गया है। राष्ट्रीय संस्था ने गत माह सीबीआई को केस सौंपने की पुष्टि की थी। उन्होंने इस मामले को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के सामने भी रखा था।
नरसिंह पर रियो ओलंपिक से पूर्व राष्ट्रीय र्डोंपग रोधी एजेंसी (नाडा) ने डोप में पॉजिटिव पाने के बाद प्रतिबंध लगाया था, लेकिन बाद में नाडा ने पहलवान को क्लीनचिट देते हुए ओलंपिक में भारतीय दल का हिस्सा बनने की अनुमति दे दी थी लेकिन रियो में बाउट से 24 घंटे पूर्व ही विश्व र्डोंपग रोधी एजेंसी (वाडा) ने मामले को सर्वोच्च खेल अदालत (कैस) के पास पहुंचा दिया जिसने नाडा के निर्णय को उलटते हुए नरसिंह पर प्रतिबंध लगा दिया था।
गौरतलब है कि नरसिंह ने यह भी दलील दी थी कि सोनीपत के साई सेंटर में ट्र्रेंनग के दौरान किसी जूनियर खिलाड़ी ने उनके खाने में साजिश के तहत मिलावट की थी।
रियो ओलंपिक से पूर्व भी 74 किग्रा फ्री स्टाइल वर्ग में नरसिंह और ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार के बीच ट्रायल की मांग को लेकर काफी विवाद हुआ था। सुशील ने ट्रायल कराने की मांग को लेकर अदालत में भी गुहार लगाई थी। लेकिन डब्ल्यूएफआई ने कोटा हासिल करने वाले नरसिंह को ही रियो भेजने का निर्णय किया था।
Mukesh and Anil Ambani, with call termination charge
नई दिल्ली। कॉल टर्मिनेशन चार्ज के मुद्दे पर टेलीकॉम ऑपरेटरों के बीच मतभेद उभर आए हैं । अंबानी बंधुओं ने लेवी का विरोध किया है जबकि भारती एयरटेल, आयडिया सेल्यूलर और वोडाफोन अपने इस रूख पर कायम हैं कि मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए इसकी जरूरत है ।
इंटरकनेक्शन उपयोग शुल्कों की समीक्षा पर ट्राई के परामर्श पत्र पर जवाब देते हुए मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस जियो, अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस और वीडियोकॉन ने दूरसंचार क्षेत्र की नियामक संस्था से कहा है कि वह कॉल समाप्ति शुल्क को खत्म करे । उन्होंने दलील दी कि इससे फोन कॉल की दरें उपभोक्ताओं के लिए महंगी हो जाती हैं और नई प्रौद्योगिकियां के आने से परिचालन की लागत में कमी आ रही है ।
दूसरी ओर, सुनील भारती मित्तल की अगुवाई वाली भारती एयरटेल, आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी आयडिया और ब्रिटिश टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन की भारतीय शाखा ने कॉल समाप्ति शुल्क लगाने की वकालत की है ताकि देश, खासकर ग्रामीण इलाकों जहां लोग कम खर्च करते हैं, में निवेश को बढ़ावा मिले ।