Home Headlines आतंकी की मौत पर गद्दारों का मरसीहा 

आतंकी की मौत पर गद्दारों का मरसीहा 

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आतंकी की मौत पर गद्दारों का मरसीहा 
surprised by people supporting terrirust sympathizers
surprised by people supporting terrirust sympathizers
surprised by people supporting terrirust sympathizers

कैसी विडंबना है एक आतंकवादी की मौत पर उलेमाओं द्वारा मरसीहा पढ़ा जा रहा है, छाती पीट-पीटकर मानवतावाद की दुहाई दी जा रही है। जो लोग ऐसा कर रहे हैं शायद उन्हें यह नहीं मालूम कि मुल्क से गद्दारी और दोगलेपन पर अल्ला ताला भी उन्हें माफ नहीं करेगा।

कश्मीर में बुरहान वानी की मौत पर जो गद्दार विधवा विलाप कर रहे हैं उनकी समस्या केवल एक है कश्मीर से फौज को हटाओ जिससे अमरनाथ यात्रा पर आने वाले निहत्थे हिन्दुओं का कत्लेआम किया जाए। आखिर हिन्दुओं के देश में ही हिन्दुओं की पवित्र धार्मिक यात्रा पर कुछ कठमुल्लों की खूनी हिंसा का क्या अर्थ निकाला जाए?

क्या ये इस बात का संकेत देने की कोशिश की जा रही है कि कश्मीर में केवल पाकिस्तान का षड्यंत्र ही चलेगा, वहां हिन्दुओं की किसी भी धार्मिक गतिविधि को मान्य नहीं किया जाएगा?

ऐसा करने वालों को हमारे जवान रोकेंगे उन्हें सबक सिखाएंगे तो पत्थरबाजी, नारे, प्रदर्शन, धरना और बंद करके छाती पीट-पीटकर मगरमच्छी आंसू बहाए जाएंगे। ऐसा करने वाले पाक परस्त देशद्रोहियों को भली प्रकार समझ लेना चाहिए कि जिस अमरनाथ यात्रा, जिस वैष्णो देवी मंदिर के दर्शनार्थियों और कश्मीर आने वाले हिन्दू पर्यटकों का वे विरोध करते हैं उन्हीं की दम पर इस राज्य में रहने वालों की रोजी-रोटी चलती है, जिस भारत सरकार के नियम-कानून का कश्मीर में कठमुल्ले विरोध करते हैं उसी भारत सरकार की आर्थिक मदद पर ये जिंदा हैं।

हिन्दुस्तान की सरकार और कश्मीर में पर्यटन और धार्मिक यात्रा पर आने वाले लाखों हिन्दुओं के रहमो-करम पर सांसें लेने वाले हुड़दंगी कश्मीरियों के पाक परस्त आका और इस देश के तथा-कथित धर्म निरपेक्षतावादी लोग हमें मानव अधिकारों के हनन का पाठ पढ़ा रहे हैं।

शर्म आनी चाहिए ऐसे लोगों को, दुनिया में इससे बड़ा मानव अधिकारों का हनन दूसरा क्या होगा कि किसी धर्म की पवित्र धार्मिक यात्रा पर खूनी हमले किए जाएं, यात्रा को पत्थर और गोलियां बरसाकर रोक दिया जाए और धार्मिक यात्रा पर आने वाले धर्मार्थियों के लंगर में रखे खाने को आग लगा दी जाए।

यह तो हिन्दुओं की उदारवादिता है कि ऐसा करने वाले चंद देशद्रोही इस पाश्विक दरिंदगी के बावजूद भी कश्मीर में रह पा रहे हैं। इस देश का करोड़ों हिन्दू अपनी पर उतर आए तो शायद कश्मीर में एक भी पाक परस्त सलामत नहीं बच पाएगा।

आज जो हुड़दंगी भारतीय सेना पर पत्थर बरसाते दिख रहे हैं, गोलियां दाग रहे हैं और हाथ में पाकिस्तान का झंडा थाम हिन्दुस्तान विरोधी नारे लगा रहे हैं, पिछले साल जब कश्मीर में बाढ़ आई थी तो इसी सेना ने अपनी जान पर खेलकर इनकी जान बचाई थी उस समय सेना के जवानों के आगे हाथ फैला-फैलाकर यह सपोले पानी से बाहर निकले थे।

इनका घर पुन: बस सके इसके लिए भारत सरकार ने अरबों रुपयों की सहायता यह जानते हुए दी कि कश्मीर से भारत को एक पैसे का टैक्स नहीं मिलता। इससे बड़ी मानवता दुनिया में और कोई नहीं हो सकती आज उसी भारत की फौज को मानवतावाद का पाठ पढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

यहां एक महत्वपूर्ण बात जम्मू-कश्मीर की पीडीपी सरकार के बारे में लिखना भी बहुत आवश्यक है। पिछले कालखंड की बात की जाए तो पीडीपी के दामन पर आतंक का समर्थन करने के दाग लगते रहे हैं। हो सकता है आज स्थितियां परिस्थितियां बदली हुई हैं ऐसे समय पीडीपी के उसके पुराने दाग धोने का बहुत अच्छा अवसर है। वह घाटी में हुड़दंग मचाने वाले कठमुल्लों पर सख्ती से लगाम लगाकर अपने प्रति अच्छा संदेश दे सकती है।

1947 से लेकर आज तक 70 वर्षों में कश्मीर के लिए हमारे हजारों जवानों ने अपनी शहादत दी है। आज ऐसे देशभक्तों की हुतात्माएं चीख-चीख कर कह रही हैं कि आतंकवादियों की मौत पर आंसू बहाने वाले देशद्रोहियों की तनिक भी चिंता न करते हुए भारत माता की रक्षार्थ लड़ रहे जवानों का मनोबल बढ़ाने पूरा देश एक स्वर में आवाज उठाए।

कौन सा देश बचा जहां इस्लामिक आतंक न हो।
ओसामा हाफिज सईद या बगदादी सामंत न हो।।
कैसा मजहब नीच सतत जो मातृभूमि से घात करे।
कह दो वीर सैनिकों से अब बंदूकों से बात करें।

: प्रवीण दुबे