उदयपुर के शोधार्थियों ने किया उल्कापात का अध्ययन

बादलों के कारण खुले आसमान में नहीं नजर आया उल्कापात का नजारा, बीएन विश्वविद्यालय में रात भी किया गया आॅब्जर्वेशन

सबगुरु न्यूज उदयपुर। बादलों की वजहर से 12 अगस्त की रात को उल्कापात का नजारा उदयपुर में भले ही नहीं दिखा, लेकिन शोधार्थी रात भर इस उल्कापात से आने वाली विकिरणों के अध्ययन में जुटे रहे।

उदयपुर के बीएन विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग में शोधार्थियों ने रात को वातावरण में उपलब्ध बीटा, गामा आदि विकिरणों की तीव्रता के आंकड़े दर्ज किए। विभागाध्यक्ष प्रो. एस.एन.ए. जाफरी के निर्देशन में सह विभागाध्यक्ष डाॅ. देवेन्द्र पारीक, शोधार्थी संग्राम सिंह, पुष्पेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र सिंह चैहान ने पूरी रात विकिरणों की घटती-बढ़ती तीव्रता का मापन सिंटिलेटर डिटेक्टर, जी.एम. काउंटर आदि यंत्रों से किया।

प्रो.जाफरी ने बताया कि इस अध्ययन से यह पता लगाया जा सकेगा कि उल्कापात के दौरान जो उल्कापिण्ड पृथ्वी के वायुमण्डल में आए उनमें कौन-कौन सी धातु-तत्व कितने प्रतिशत मात्रा में मौजूद थे। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकेगा कि ब्रह्माण्ड में किस तरह के पदार्थ मौजूद हैं। इससे पृथ्वी के विकास के क्रम को जानने में भी अध्ययन आगे बढ़ता है।