ओडिशा में इलाज में लापरवाही को लेकर दंत चिकित्सक को एक लाख रुपए जुर्माना देने का निर्देश

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भुवनेश्वर। ओडिशा में केंद्रपाड़ा ज़िला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक निजी दंत चिकित्सक को एक महिला को एक लाख रुपए का मुआवज़ा देने का आदेश दिया है।

आयोग ने दंत चिकित्सक को मेडिकल लापरवाही और सेवा में कमी का दोषी पाया है। यह मामला दांतों के इलाज से जुड़ा है, जिसके कारण महिला को लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां झेलनी पड़ीं। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानाें के तहत दिए गये अपने आदेश में आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता नलिनी मोहंती यह साबित करने में सफल रहीं कि दंत चिकित्सक डॉ. मिलान कुमार द्वारा किया गया इलाज देखभाल के अपेक्षित स्तर से कम था और इसके कारण उन्हें काफी शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानी हुई।

शिकायत के अनुसार मोहंती ने अपने ऊपरी और निचले जबड़े में डेंटल ब्रिज लगवाने के लिए इलाज कराया था और चार महीने की अवधि में 14 बार डेंटिस्ट के क्लिनिक गई थीं। बार-बार सलाह लेने के बावजूद, उन्होंने आरोप लगाया कि इलाज ठीक से नहीं किया गया, जिससे वह लंबे समय तक सामान्य रूप से खाना चबाने में असमर्थ रहीं।

शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि इन परेशानियों के कारण उनका वज़न तेज़ी से कम हो गया (56 किलोग्राम से घटकर 42 किलोग्राम हो गया) और वह रोज़मर्रा के घरेलू काम करने में भी असमर्थ हो गईं। उन्होंने बताया कि गलत डेंटल प्रक्रिया से हुई परेशानियों के इलाज के लिए उन्हें तीन अन्य डॉक्टरों से इलाज कराना पड़ा, जिनमें कटक के सरकारी एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के विशेषज्ञ भी शामिल थे।

सबूतों की जांच करने के बाद, आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि मामले की परिस्थितियां ही दंत चिकित्सक की भारी लापरवाही को साबित करती हैं। आयोग ने कहा कि किसी विशेषज्ञ की मेडिकल राय की ज़रूरत नहीं थी क्योंकि तथ्य स्पष्ट रूप से लापरवाह इलाज की ओर इशारा कर रहे थे।

सेवा में कमी के लिए दंत चिकित्सक को ज़िम्मेदार ठहराते हुए आयोग ने कहा कि उपचार में लापरवाही के कारण शिकायतकर्ता को लंबे समय तक तकलीफ़, मानसिक पीड़ा, आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। आयोग ने डॉ. कुमार को इस आदेश के मिलने के 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा, उत्पीड़न, आर्थिक नुकसान और मुक़दमे के खर्च के मुआवज़े के तौर पर एक लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया। इसके साथ ही, यह भी आदेश दिया कि यदि तय समय के भीतर राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो आदेश की तारीख से लेकर भुगतान होने तक उस पर छह प्रतिशत प्रतिशत दर से ब्याज लगेगा।