राजस्थान हाईकोर्ट ने रेप पीड़िता को गर्भ समाप्त करने की अनुमति प्रदान की

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जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने एक महत्वपूर्ण आदेश में 16 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता को करीब साढ़े छह महीने की गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति प्रदान की है।

न्यायालय ने कहा कि किसी भी महिला, विशेषकर नाबालिग पीड़िता को उसकी इच्छा के विरुद्ध अवांछित गर्भावस्था जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। महिला की प्रजनन स्वायत्तता, शारीरिक गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित मौलिक अधिकार हैं।

न्यायमूर्ति बिपिन गुप्ता की एकलपीठ ने यह आदेश पीड़िता की मां द्वारा दायर याचिका पर सुनाया। याचिका में बताया गया कि नाबालिग दुष्कर्म की शिकार हुई थी और उसके गर्भवती होने का पता चलने पर गर्भावस्था 26 सप्ताह से अधिक हो चुकी थी। मामले में संबंधित थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पॉक्सो अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज है।

सुनवाई के दौरान न्यायालय को बताया गया कि पीड़िता गंभीर मानसिक आघात से गुजर रही है और घटना के बाद उसने दो बार आत्महत्या का प्रयास भी किया। परिवार का कहना था कि गर्भावस्था जारी रहने से उसकी मानसिक स्थिति और अधिक प्रभावित हो सकती है। अदालत ने इन परिस्थितियों को गंभीरता से लेते हुए पीड़िता के मानसिक स्वास्थ्य, भविष्य और उसकी इच्छा को महत्वपूर्ण माना।

उच्च न्यायालय ने गर्भसमापन की अनुमति देते हुए संबंधित अस्पताल को विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में पूरी सावधानी और आवश्यक चिकित्सा नियमों के तहत प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिये हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि गर्भसमापन की प्रक्रिया के दौरान जीवित शिशु का जन्म होता है, तो अस्पताल उसे सर्वोत्तम उपलब्ध चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।

न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि पीड़िता नवजात की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहती है तो राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां बच्चे की देखभाल, संरक्षण और पुनर्वास की जिम्मेदारी उठाएंगी। यह प्रक्रिया किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप पूरी की जाएगी।

उच्च न्यायालय ने कहा कि दुष्कर्म से उत्पन्न अवांछित गर्भावस्था को जारी रखने के लिए किसी महिला को मजबूर करना उसके मौलिक अधिकारों के विपरीत होगा और ऐसे मामलों में उसकी गरिमा, इच्छा तथा प्रजनन संबंधी स्वायत्तता को सर्वोच्च महत्व दिया जाना चाहिए।