राजस्थान हाईकोर्ट ने बिना सुनवाई के की गईं कठोर टिप्पणियों को अवैध करार दिया

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जयपुर। राजस्थान में राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ बिना सुनवाई के की गई निचली अदालत की कठोर टिप्पणियों को अवैध करार दिया है।

न्यायमूर्ति अनिल कुमार उपमन की एकल पीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी सरकारी अधिकारी या व्यक्ति के खिलाफ बिना नोटिस दिए और पक्ष सुने बिना प्रतिकूल अथवा अपमानजनक टिप्पणी करना न केवल कानून के विरुद्ध है बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है। न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश के उस हिस्से को निरस्त कर दिया, जिसमें विमलसिंह और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कठोर टिप्पणियां दर्ज की गई थीं।

मामला वर्ष 2018 का है, जब थाना सरोला, जिला झालावाड़ में नशीले द्रव्य एवं मनोत्तेजक पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत तेजराज उर्फ तेजू और अन्य आरोपियों के खिलाफ मादक पदार्थ तस्करी का मामला दर्ज हुआ। पुलिस ने तलाशी, जब्ती और जांच प्रक्रिया का दावा करते हुए आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया। यह मामला विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस मामलात, झालावाड़ के समक्ष चला।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं कर पाया और बचाव पक्ष ने तलाशी, जप्ती, सैंपल सीलिंग और कानूनी प्रक्रिया में गंभीर खामियाँ उजागर कर दीं। उनतीस अप्रैल 2023 को निचली अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया और अपने फैसले में जांच अधिकारियों की भूमिका पर कठोर टिप्पणी करते हुए तत्कालीन एएसपी विमलसिंह सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियां कीं। अदालत ने पुलिस महानिदेशक, राजस्थान को उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे।

इस आदेश को विमलसिंह ने राजस्थान उच्च न्यायालय में चुनौती दी और दलील दी कि निचली अदालत ने न तो कोई नोटिस दिया और न ही सुनवाई का अवसर। उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियां उनकी सेवा रिकॉर्ड, प्रतिष्ठा और भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं।