बेलगावी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने शताब्दी वर्ष के विस्तार अभियान के तहत संगठन की रणनीति बनाने और संघ के 100वें वर्ष के समारोहों की समीक्षा करने के लिए शुक्रवार को अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक का शुभारंभ किया।
आरएसएस की सबसे महत्वपूर्ण वार्षिक संगठनात्मक गतिविधियों में से एक मानी जाने वाली इस उच्च-स्तरीय बैठक में सरसंघचालक मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, सभी सह-सरकार्यवाह, अखिल भारतीय विभाग प्रमुख और उनके सहयोगी, कार्यकारी समिति के सदस्य, क्षेत्र प्रचारक, सह-क्षेत्र प्रचारक तथा सभी 46 प्रांतों के प्रांत प्रचारक और सह-प्रचारक शामिल हो रहे हैं। संघ से प्रेरित विभिन्न संगठनों के संगठन मंत्री भी इसमें भाग ले रहे हैं।
आरएसएस की ओर से जारी एक बयान में बताया गया कि बैठक का मुख्य फोकस शाखाओं के तेजी से विस्तार के माध्यम से संगठन के जमीनी नेटवर्क को मजबूत करने, स्थानीय स्तर पर कार्य योजनाओं के कार्यान्वयन की समीक्षा करने और मार्च 2026 के बाद देशभर में आयोजित प्रशिक्षण शिविरों की रिपोर्ट का आकलन करने पर होगा।
विचार-विमर्श का एक मुख्य केंद्र संघ के शताब्दी समारोहों के तहत की गयी गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा और आगामी 20 अक्टूबर को विजयदशमी तक निर्धारित शेष कार्यक्रमों के लिए कार्ययोजना को अंतिम रूप देना होगा। नेतृत्व द्वारा शताब्दी वर्ष के अंतिम चरण के दौरान जन-संपर्क बढ़ाने और संगठनात्मक उपस्थिति को मजबूत करने की रणनीतियों पर भी चर्चा किये जाने की उम्मीद है।
बैठक में पहले के संगठनात्मक कार्यक्रमों के दौरान लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन की समीक्षा की जायेगी और आने वाले वर्ष की प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसमें संघ के जन-संपर्क प्रयासों के हिस्से के रूप में 2026-27 के लिए भागवत के देशव्यापी यात्रा कार्यक्रम को भी अंतिम रूप दिया जाएगा।
आरएसएस ने कहा कि 2025 में शुरू हुए शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम इस साल विजयदशमी तक जारी रहेंगे। यह कार्यक्रम संगठन के विस्तार, कार्यकर्ताओं के विकास और जनता से जुड़ाव पर केंद्रित देशव्यापी अभियान का समापन होगा।



