भीलवाड़ा में समग्र शिक्षा विभाग का कनिष्ठ अभियंता रिश्वत प्रकरण, 50 हजार लेते दलाल अरेस्ट

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8.82 लाख रुपए के रनिंग बिल को पास कराने के बदले मांगी गई थी रिश्वत
भीलवाड़ा। राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने सरकारी निर्माण कार्यों के भुगतान के बदले रिश्वत मांगने के मामले में कार्रवाई करते हुए भीलवाड़ा में समग्र शिक्षा कार्यालय के एक कनिष्ठ अभियंता के कथित दलाल को 50 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान श्रेणीक चौधरी के रूप में हुई है। एसीबी की इस कार्रवाई से विभागीय हलकों में हलचल मच गई है।

8.82 लाख के बिल के भुगतान के लिए मांगी थी रिश्वत

एसीबी महानिदेशक गोविन्द गुप्ता के अनुसार परिवादी ने शिकायत में बताया कि उसकी फर्म ने रायपुर पंचायत ब्लॉक में सिविल निर्माण कार्य करवाए थे। इन कार्यों का पहला रनिंग बिल 8 लाख 82 हजार 647 रुपए का था। आरोप है कि इस बिल को पास करने की एवज में समग्र शिक्षा कार्यालय में संविदा पर कार्यरत कनिष्ठ अभियंता अनिल भट्ट अपने कथित दलाल श्रेणीक चौधरी के माध्यम से 50 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहे थे। इसके अतिरिक्त टेस्टिंग के नाम पर 10 हजार रुपए अलग से मांगे जाने का भी आरोप है।

शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने पहले रिश्वत मांग का सत्यापन करवाया। सत्यापन के दौरान कनिष्ठ अभियंता अनिल भट्ट द्वारा 50 हजार रुपए अपने दलाल श्रेणीक चौधरी को देने के लिए कहने की पुष्टि हुई। इसके बाद एसीबी ने ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई।

पेट्रोल पंप के पास कार में ले रहा था रिश्वत

अजमेर रेंज के डीआईजी नारायण टोगस के सुपरविजन में एसीबी भीलवाड़ा प्रथम चौकी के उप अधीक्षक पारसमल के नेतृत्व में टीम ने जाल बिछाया। गुरुवार को गर्ग पेट्रोल पंप के पास रेलवे फाटक पर आरोपी श्रेणीक चौधरी अपनी स्विफ्ट कार में परिवादी से रिश्वत की राशि ले रहा था। इसी दौरान एसीबी टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान आरोपी के कब्जे से बरामद 50 हजार रुपये में 10 हजार रुपए असली भारतीय मुद्रा और 40 हजार रुपए डमी नोट शामिल थे।

कनिष्ठ अभियंता की भूमिका की भी जांच

एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव एवं पुलिस महानिरीक्षक एस. परिमला के सुपरविजन में आरोपी से पूछताछ और आगे की कार्रवाई की जा रही है। मामले में कनिष्ठ अभियंता अनिल भट्ट की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया है।