धर्मनगरी भीलवाड़ा में संत दर्शन एवं शोभायात्रा में दिखेगी सनातन एकता की झलक

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महामंडलेश्वर स्वामी गुरूशरणानंद महाराज रमणरेती का भव्य स्वागत
भीलवाड़ा। हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर भीलवाड़ा के तत्वावधान में आयोजित आठ दिवसीय सनातन मंगल महोत्सव एवं दीक्षा दान समारोह के सातवें दिन बुधवार 25 फरवरी को भीलवाड़ा शहर में संत दर्शन एवं सनातन शोभायात्रा का भव्य आयोजन होगा। इस शोभायात्रा के माध्यम से दीक्षा ग्रहण करने जा रहे तीनों दीक्षार्थियों इन्द्रदेव, सिद्धार्थ एवं कुनाल की नगर परिक्रमा होगी। आयोजन के जरिए संत दर्शन के साथ सनातन एकता की झलक भी दिखाई देगी।

बुधवार सुबह 8 बजे अयोध्यानगर (दूधाधारी मंदिर) से प्रारंभ होने वाली शोभायात्रा में दीक्षार्थी बंधु, संत महापुरुषों के साथ नगर की प्रभात फेरी मंडलियां शामिल होंगी। हजारों श्रद्धालु भाई-बहन इसमें भाग लेकर सनातन एकता का प्रदर्शन करेंगे। शोभायात्रा नगर परिक्रमा करते हुए हरि शेवा धाम पहुंचकर संपन्न होगी।

शोभायात्रा में उदासीन कार्ष्णि पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी गुरूशरणानंद महाराज रमणरेती गोकुल वन मथुरा सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए संत महात्माओं का सानिध्य मिलेगा। मंगलवार को गुरूशरणानंद महाराज के हेलिकॉप्टर से भीलवाड़ा पहुंचने पर हरि शेवा उदासीन आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज सहित अनेक संतों ने भव्य स्वागत किया।

महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने बताया कि दीक्षार्थियों की नगर परिक्रमा को लेकर भीलवाड़ा में उत्साह का वातावरण है और नजारा अयोध्या जैसा प्रतीत हो रहा है। नगर में जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए हैं तथा सर्व सनातनी इस आयोजन में शामिल होने को उत्सुक हैं। शोभायात्रा में नासिक, जम्मू, उड़ीसा की ढोल टीमों के साथ शिव बारात एवं उज्जैन से महाकाल की टीम भी आकर्षण का केंद्र रहेगी।

उन्होंने बताया कि 26 फरवरी को सुबह 9 बजे से हरि शेवा आश्रम परिसर में दीक्षा दान समारोह का भव्य आयोजन होगा। इस अवसर पर दोपहर 1 बजे से एक संगत एक पंगत एक भाषा एक भूषा के भाव के साथ विशाल समष्टि भंडारे का आयोजन अग्रवाल उत्सव भवन (रोडवेज बस स्टैंड के सामने) में किया जाएगा।

इधर, सनातन मंगल महोत्सव के अंतर्गत श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के छठे दिन आज व्यास पीठ से श्रीधाम वृन्दावन के कथा व्यास डॉ. श्यामसुन्दर पाराशर ने रासलीला एवं रूक्मणी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वाचन किया। उन्होंने कहा कि रास जीवात्मा और परमात्मा के दिव्य मिलन का प्रतीक है। रास के माध्यम से भगवान अपने रसिक भक्तों को रसास्वादन कराते हैं।

डॉ. पाराशर ने कहा कि वियोग के बिना संयोग का महत्व नहीं और विरह के बिना मिलन का सुख नहीं होता। भगवान की कथा का अमृत जीवन के सारे संताप नष्ट कर देता है और तनाव दूर करता है। उन्होंने माता-पिता की सेवा का महत्व बताते हुए कहा कि जीवन में अपने दाता और उपकारी को कभी नहीं भूलना चाहिए।

रूक्मणी विवाह प्रसंग के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और रूक्मणी की सजीव झांकी सजाई गई। इस अवसर पर पांडाल में उल्लास का वातावरण रहा और संतों ने भगवान श्रीकृष्ण संग फूलों की होली खेली। गोपी संग राधा नाचे, कृष्ण नाचे, आज दुल्हा बने नंदलाल जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और जयकारों से परिसर गूंज उठा।

श्रीरामचरितमानस पाठ, अखण्ड श्रीराम नाम संकीर्तन, श्री विष्णु महायज्ञ, शतचण्डी, अखण्ड श्रीमद् भगवद्गीता पाठ एवं रासलीला का आयोजन प्रतिदिन जारी है। बुधवार को सभी धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण होंगे। वहीं गुरुवार को श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिवस दोपहर 1 से 4 बजे तक सुदामा चरित्र प्रसंग एवं भागवत सार का वाचन होगा।