रेप के दोषी आसाराम बापू की अंतरिम मेडिकल जमानत याचिका खारिज

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जेल में 24 घंटे केयरटेकर रखने की मिली अनुमति
जोधपुर/नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट ने गुरुवार को दुष्कर्म के दोषी और स्वयंभू बाबा आसाराम उर्फ आशुमल को मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया, हालांकि उन्हें जेल में चौबीसों घंटे अपनी पसंद का एक प्रशिक्षित देखभालकर्ता रखने की अनुमति दी गई है।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आसाराम की चिकित्सा स्थिति बिगड़ती है, तो उसे दोबारा अंतरिम जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता होगी।

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली द्वारा सौंपी गई मेडिकल रिपोर्ट पर विचार करने के बाद अंतरिम जमानत देने से इनकार किया। शीर्ष अदालत ने 21 जुलाई 2026 के अपने निर्देश में एम्स को आसाराम की विस्तृत चिकित्सा जांच और व्यापक मूल्यांकन करने का आदेश दिया था।

एम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि आसाराम को फिलहाल अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उसे निरंतर चिकित्सा सहायता की जरूरत हो सकती है। इस रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए पीठ ने उसे 24 घंटे के लिए अपनी पसंद का प्रशिक्षित केयरटेकर रखने की अनुमति दे दी।

यह अंतरिम जमानत याचिका असाराम की उस मुख्य अपील का हिस्सा है, जिसमें उसने राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसने जोधपुर स्थित उसके आश्रम में 2013 में एक नाबालिग शिष्या से दुष्कर्म के मामले में उसकी सजा को बरकरार रखा था।

मई 2026 में राजस्थान उच्च न्यायालय ने असाराम की सजा और भारतीय दंड संहिता, पोक्सो अधिनियम तथा किशोर न्याय अधिनियम के तहत अन्य अपराधों के लिए उसकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा था। उच्च न्यायालय के इसी फैसले के खिलाफ आसाराम ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया है।