मद्रास हाईकोर्ट के टीवीके विधायक की वोटिंग पर रोक का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

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चेन्नई। मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा में एक विधायक को बुधवार को पेश होने वाले विश्वास प्रस्ताव पर मत डालने से रोक दिया। इस मामले को फौरन सुप्रीमकोर्ट के संज्ञान में लाया गया और इस मामले में न्यायालय बुधवार को सुनवाई करेगा।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने के लिए विश्वास प्रस्ताव बुधवार को ही रखने वाले हैं। मगर इससे ठीक पहले, मद्रास हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने उनकी पार्टी के तिरुपत्तूर से विधायक सीनिवासा सेतुपति को सदन की इस कार्यवाही में शामिल होने से रोक दिया है।

न्यायालय ने यह रोक द्रमुक नेता केआर पेरियाकरुप्पन की एक अर्जी पर लगाई है,जिसमें उन्होंने सेतुपति की जीत को चुनौती दी है। गौर करने वाली बात यह है कि 23 अप्रैल को हुए चुनावों में सेतुपति महज एक वोट के अंतर से जीते थे।

पूर्व मंत्री पेरियाकरुप्पन का कहना है कि शिवगंगा जिले के तिरुपत्तूर निर्वाचन क्षेत्र के डाक मतपत्र (पोस्टल बैलेट) गलती से दूसरे जिले के तिरुपत्तूर निर्वाचन क्षेत्र में भेज दिए गए थे। उन्होंने दावा किया कि वहां के चुनाव अधिकारी ने उन वोटों को खारिज कर दिया, जिससे उनके नतीजे पर असर पड़ा। उन्होंने अदालत से गुजारिश की है कि चुनाव आयोग को इन वोटों की दोबारा गिनती का हुक्म दिया जाये।

न्यायमूर्ति विक्टोरिया गौरी और एन सेंथिलकुमार की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह अंतरिम आदेश सुनाया, जिससे टीवीके विधायक कल होने वाले अहम वोटिंग में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।

यह फैसला आने के बाद सेतुपति ने फौरन उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से इस मामले की जल्द सुनवाई की दरख्वास्त की है। इस मामले में कल सुनवाई होने की उम्मीद है। दूसरी तरफ, पेरियाकरुप्पन ने भी उच्चतम न्यायालय में अर्जी दाखिल कर मांग की है कि उनका पक्ष सुने बिना कोई भी फैसला न सुनाया जाए।

इस मामले के तीसरे पक्ष चुनाव आयोग ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि नतीजों के ऐलान के बाद ऐसी कोई भी शिकायत सिर्फ चुनावी याचिका के जरिए ही की जा सकती है, न कि रिट याचिका के माध्यम से। आयोग के वकील ने दलील दी कि मतों की अदला-बदली का आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत है और इसका कोई सबूत नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि पोस्टल बैलेट पर निर्वाचन क्षेत्र का नाम साफ लिखा होता है, इसलिए गलत जगह जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। आयोग ने यह भी साफ किया कि चुनाव अधिकारी के पास दोबारा गिनती कराने का कोई कानूनी अख्तियार नहीं है।

याचिकाकर्ता के वकील एनआर इलांगो ने चुनाव आयोग की दलीलों को गलत बताया और कहा कि खुद चुनाव अधिकारी ने मतों की अदला-बदली की बात मानी है। उन्होंने दलील दी कि ऐसी अनहोनी स्थिति के लिए कानून में कोई साफ रास्ता नहीं बताया गया है, इसलिए न्यायालय का दखल जरूरी है। विधानसभा में रखा जाने वाला विश्वास प्रस्ताव मुख्यमंत्री विजय के लिए बेहद अहम है, और ऐसे में एक विधायक का कम होना सियासी तौर पर काफी मायने रख सकता है।