
सबगुरु न्यूज- सिरोही। सिरोही के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में आबूरोड में अनियमित तौर पर कार्मिक की स्थाई नियुक्ति करने और तनख्वाह जारी होने के प्रकरण की पत्रावली आरटीआई में मांगने की बात कही थी, वो पत्रावली ही आबूरोड नगर पालिका से गायब है।
जिला कांग्रेस के सचिव और आबूरोड नगर पालिका के निवर्तमान पार्षद ने ये इस संबंध में आबूरोड नगर पालिका में आरटीआई के तहत इस पत्रावली को मांगा था। उन्होंने बताया कि ये पत्रावली ही नगर पालिका से गायब है इसे सर्च करने के लिए अधिशासी अधिकारी योगेश आचार्य ने इसका सर्च नोटिस जारी किया है। जिसमें सभी 14 अनुभागों ने उनके पास पत्रावली नहीं होने की जानकारी दी है। योगेश आचार्य ने शमशाद अली को ये जानकारी लिखित में दी है।
उल्लेखनीय है कि आबूरोड में हाल ही में सफाई कार्मिकों का धरना हुआ था। इसमें ये मामला भी उठा था कि आबूरोड नगर पालिका में अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी ने एक संविदा कर्मी को नियम विरुद्ध स्थाई कर दिया है और नगर पालिका बोर्ड के डिसॉल्व होने के बाद भी इसकी तनख्वाह जारी होती रही। इस आंदोलन के दौरान इसे लेकर 16 जून को निवर्तमान पार्षद शमशाद ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत संबंधित कार्मिक परेश माली की नियुक्ति से संबंधित पत्रावली मांगी थी। इस आंदोलन के बाद नगर पालिका आबूरोड के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी अनिल झिंगोनिया को 17 जून को निलंबित कर दिया है था। इनका बाद लगे कार्यवाहक आयुक्त योगेश आचार्य ने 23 जून को शमशाद अली को लिखित सूचना देकर बताया कि उन्होंने जो पत्रावली सूचना के अधिकार के तहत जिस कार्मिक परेश माली की निजी और सर्विस बुक मांगी थी वो पत्रावली उपलब्ध नहीं है। उन्होंने पत्र में बताया कि इसका सर्च नोटिस जारी किया था।
अधिशासी अधिकारी ने शमशाद अली को नोटिस की जो कॉपी भेजी है उसमें सभी 14 अनुभागों ने ये पत्रावली उनके पास नहीं होने की नोटिंग डाली है। शमशाद अली ने आरोप है कि नगर पालिका में भाजपा बोर्ड के अंतिम समय में तत्कालीन बोर्ड मुखिया और तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ने संविदा कर्मी परेश माली की नियुक्ति चतुर्थ श्रेणी कार्मिक के रूप में की थी। कांग्रेस ने ये धरने के दौरान आरोप लगाया था कि इसके बाद जनवरी से मई तक इसकी तनख्वाह का भी भुगतान हुआ है। शुक्रवार को हुई पत्रकार वार्ता में संयम लोढ़ा ने कहा था कि अस्थायी नियुक्ति को स्थाई करने और तनख्वाह जारी होने के संबंध में पत्रावली की सत्य प्रतिलिपि मंगवाई है। इसके आने के बाद जो भी इसमें शामिल होगा उस पर समुचित कार्रवाई के लिए प्रयास किए जाएंगे।

अब आगे क्या?
पत्रावली ज्गायब होने से इस प्रकरण में शामिल एकाध कार्मिक ये नेता बच सकते हैं। लेकिन, उसकी तनख्वाह ट्रेजरी से जारी हुई होगी मल्टीपल अकाउंटिंग सिस्टम के तहत इसका रिकॉर्ड ट्रेजरी से भी मिल जाएगा। तो संभव है कि नियुक्ति और तनख्वाह के आदेश करने वाले कुछ नेता, अधिकारी या कार्मिक बच जाएं। लेकिन जिनके जिम्मे तनख्वाह बनाने और उसका चेक या बाउचर ट्रेजरी में भेजने का अधिकार है वो इसकी चपेट में आएगा। तनखवाह जारी करने से पहले नियमित हाजिरी भी हुई होगी। ये भी ट्रेजरी मे जाता होगा। ऐसे में उपस्थिति रजिस्टर से भी महत्वपूर्ण सबूत मिल सकेगा। ऐसे में इस प्रकरण में शामिल नहीं होने पर भी इस रजिस्टर को वेरीफाई करने वाले व्यक्तियों पर भी गाज गिर सकती है।
– सिरोही में भी था यही खेल फिर मिली पत्रावली
अनियमितताए पकड़ आने पर नगर पालिकाओं में पत्रावली गायब कर देने खेल नया नहीं है। हाल में रामझोरखा भूमि के प्रकरण में भी सिरोही नगर परिषद में प्रकाश धवल के द्वारा आरटीआई रामझरोखा की विवादित भूमि के 2002 में जारी पट्टे की पत्रावली मांगी गई थी। नगर परिषद ने इसके भी गायब होने की दलील दी थी। फिर कांग्रेस के सख्त रुख अपनाने पर ये पत्रावली भी बाहर आई और इसकी प्रतिलिपि मिली।


