अजमेर। संभाग के पशु-चिकित्सकों की फोरेंसिक एस्पेक्ट्स ऑफ वेट्रोलीगल केसेज विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला गुरुवार को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के रीट कार्यालय स्थित सभागार में आयोजित की गई।
पशुपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ आलोक कुमार खरे ने बताया कि पशु चिकित्सा संबंधी कानूनी मामलों के फोरेंसिक पहलूओं पर यह कार्यशाला भारत सरकार के एस्केड योजनान्तर्गत आयोजित की गई जिसमें अजमेर संभाग के टोंक, भीलवाड़ा, नागौर, कुचामन डीडवाना, ब्यावर और अजमेर जिले के 50 पशु-चिकित्सकों ने भाग लिया।
डॉ खरे ने कहा कि इस कार्यशाला में क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला अजमेर के अतिरिक्त निदेशक राजवीर ने पशु चिकित्सा के क्षेत्र में वेट्रोलीगल केसेज में विधि विज्ञान की आवश्यकता पर व्याख्यान दिया। सहायक निदेशक सुमन बुडानिया ने पशुओं और वन्यजीवों के क्षेत्र में विष विज्ञान संबंधी मामलों विस्तृत जानकारी दी।
सहायक निदेशक डॉ राकेश रोशन शर्मा ने यौन उत्पीड़न (पशुगमन) मामलों, डीएनए फोरेंसिक के लिए प्रजातियों की पहचान से संबंधित मामलों (वंश विवाद, असली और नकली पशु अंग), पशुओं से संबंधित अपराधों (वन्यजीव संरक्षण अधिनियम आदि) के लिए सही नमूने और उनके संग्रह पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उपनिदेशक डॉ विजेन्द्र सिंह शेखावत ने फोरेंसिक प्रयोगशालाओं में नमूने भेजने के लिए क्या करें और क्या न करें, फोरेंसिक प्रयोगशाला में नमूनों की अस्वीकृति के सामान्य कारण, डूबने और बिजली के झटके से पशुओं की मृत्यु के कारण आदि विषयों पर जानकारी दी।
पशुपालन विभाग के शासन सचिव डॉ समित शर्मा के निर्देशानुसार निदेशालय की डॉ संगीता भार्गव उपनिदेशक (प्रयोगशाला) ने एफएमडी टीकाकरण अभियान के बारे में उपस्थित सभी पशु चिकित्सकों को 100 प्रतिशत भारत पशुधन एप इंद्राज किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि अगले 15 दिन के लिए एप खोला गया है और इस दौरान टीकाकरण का शत् प्रतिशत इंद्राज किया जाना सुनिश्चित करें।
डॉ आलोक खरे ने कार्यशाला के समापन पर पशुपालन विभाग अजमेर के उपनिदेशक डाॅ महेश पाण्डला, उपनिदेशक डाॅ मुदित नारायण माथुर और वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ रचना जैन, सुभाषचन्द्र, राजेश रावत, दिलीप चौधरी, विजय लक्ष्मी, सुनील लोहिया, संजय शर्मा को कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए धन्यवाद प्रेषित किया।



