बजट में उद्यमों के विकास के लिए 10 हजार करोड़ की एसएमई निधि का प्रस्ताव

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नई दिल्ली। सरकार ने भविष्य में उत्कृष्ट उद्यमों के सृजन के उद्देश्य से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए दस हजार करोड़ रुपए की निधि का प्रस्ताव किया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को आम बजट 2026-27 पेश करते हुए कहा कि एमएसएमई को विकास का महत्वपूर्ण इंजन करार दिया और इसके विकास के लिए तीन सूत्रीय दृष्टिकोण का प्रस्ताव रखा। इनमें पहला इक्विटि समर्थन है जिसमें उन्होंने लघु तथा मध्यम उद्यम के विकास के लिए दस हजार करोड़ रुपए का एक समर्पित निधि का प्रस्ताव रखा है। इसके अंतर्गत चुनिंदा मानकों पर भविष्य में उत्कृष्ट उद्यमों का सृजन करना है।

वित्तीय उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने के दूसरे दृष्टिकोण पर वित्त मंत्री ने कहा कि एमएसएमई के लिए सात लाख करोड़ रुपए से ज्यादा रकम की व्यवस्था की गई है। इसकी क्षमता का पूरा फायदा उठाने के लिए उन्होंने चार उपायों का प्रस्ताव रखा है जिनमें एमएसएमई से सावर्जनिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा समस्त खरीदों के लिए ट्रेड्स को लेन-देन निपटान प्लेटफॉर्म के रूप में उपयोग करने का अधिदेश करना, ट्रेड्स प्लेटफॉर्म पर बीजक छूट के लिए सीजीटीएमएसई के जरिये ऋण गारंटी सहायता तंत्र की शुरुआत करना, एमएसएमई से सरकारी खरीदों के बारे में फाइनेंसर्स तक जानकारी साझा करने के लिए जीईएम को ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (टीआरईडीएस) को जोड़ना, और ट्रेड्स प्राप्तियों को आस्ति-समर्थित प्रतिभूतियों के रूप में प्रस्तुत करना। इसका उद्देश्य नगदी एवं लेनदेनों के निपटान करते हुए एक दूसरा बाजार विकसित करना है।

उन्होंने कहा कि खासकर टियर-2 और टियर-3 नगरों में ‘कॉर्पोरेट मित्रों’ के समूह का विकास के लिए के लिए अल्पावधि की मॉड्यूलर पाठ्यक्रमों और व्यवहारिक टूल्स की डिजाइन के लिए सरकार आईसीएआई, आईसीएसआई, आईसीएमएआई जैसे संस्थानों की मदद करेगी। यह प्रणाणित अर्ध-पेशेवर एमएसएमई को कम लागत पर अनुपालन आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेंगे।