अजमेर। महर्षि दयानंद सरस्वती के निर्वाण दिवस के अवसर पर महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (MDSU), अजमेर में वैदिक परंपरा के अनुरूप यज्ञ का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय और महर्षि दयानंद शोधपीठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां अर्पित की गईं। यज्ञ में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल सहित शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी और शोधार्थी शामिल हुए।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने यज्ञ के माध्यम से विश्वविद्यालय की सुख-समृद्धि, शैक्षणिक प्रगति, सकारात्मक वातावरण और समाज के सर्वकल्याण की कामना की। वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ संपन्न अनुष्ठान में भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं के महत्व को भी रेखांकित किया गया।
यज्ञ से मजबूत होती है सामूहिक संकल्प की भावना : कुलगुरु
इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय में विशेष एवं शुभ अवसरों पर हवन-यज्ञ आयोजित करने की परंपरा रही है। ऐसे आयोजन न केवल महापुरुषों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम हैं, बल्कि ईश्वर से सद्बुद्धि, ज्ञान, सुख और समृद्धि की प्रार्थना करने का अवसर भी प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि यज्ञ के माध्यम से हम विश्वविद्यालय में निरंतर शुभ और मंगलकारी कार्य होने तथा सभी के जीवन में उन्नति की कामना करते हैं। हमारी प्रार्थना है कि सभी लोग सुखी रहें और किसी को भी दुख का सामना नहीं करना पड़े।
प्रो. अग्रवाल ने कहा कि सामूहिक रूप से आयोजित होने वाले आध्यात्मिक अनुष्ठानों से लोगों में सहभागिता, सकारात्मकता और सामूहिक संकल्प की भावना मजबूत होती है। विश्वविद्यालय की ऐसी परंपराएं भारतीय वैदिक संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
वैदिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का संदेश
कार्यक्रम की संयोजक प्रो. रितु माथुर ने यज्ञ में शामिल हुए कुलगुरु सहित सभी शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन में सहभागिता के लिए सभी का धन्यवाद किया।
वैदिक मंत्रोच्चार और सामूहिक मंगलकामनाओं के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजन के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक संस्कृति और सामूहिक कल्याण की भावना को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया।



