पंच परिवर्तन भारत की सांस्कृतिक जड़ों को सुरक्षित रखते हुए आगे बढ़ने का माध्यम : सुनील आंबेकर

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जयपुर। कांस्टिट्यूशनल क्लब ऑफ राजस्थान में आयोजित समारोह में विकसित भारत : पंच परिवर्तन (एक महत्वपूर्ण पहल) पुस्तक का विमोचन कार्यक्रम हुआ।

पुस्तक विमोचन अवसर पर मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि विकसित भारत : पंच परिवर्तन राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैचारिक कृति है। विकसित भारत की संकल्पना केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि उसका वास्तविक अर्थ हमारी संस्कृति, सामाजिक चेतना, नागरिक मूल्यों और नैतिकता को सहेजने में निहित है।

उन्होंने कहा कि पंच परिवर्तन आत्मनिर्भरता, सशक्त पारिवारिक कुटुंब प्रबोधन, तकनीकी विकास, नागरिक कर्तव्य और भारत की विशिष्ट पहचान अनेकता में एकता अर्थात समरसता इन सभी के माध्यम से भारत अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सुरक्षित रखते हुए आगे बढ़ने का माध्यम है।

उन्होंने पंच परिवर्तन को भारतीय संस्कृति के संरक्षण और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण आधार बताया और इसमें समाज के द्वारा व्यवहारिक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा हरियाणा प्रदेश प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया ने कहा कि पंच परिवर्तन भारत को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बनाएंगे, बल्कि उसे सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों के स्तर पर भी विश्व में नेतृत्वकारी भूमिका प्रदान करेंगे। उन्होंने इस पुस्तक को विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक उपयोगी वैचारिक मार्गदर्शक बताया।

विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त रानू शर्मा ने पुस्तक विमोचन पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रकार की वैचारिक रचनाए नागरिक कर्तव्यों, सामाजिक अनुशासन और जिम्मेदार नागरिकता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

पुस्तक के संपादक डॉ. राजा भोज शर्मा ने कहा कि यह पुस्तक वर्षों के आत्मचिंतन, शैक्षणिक अनुभव और सामाजिक संवाद का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समरसता, सशक्त परिवार, स्वावलंबन, पर्यावरण चेतना और नागरिक कर्तव्य ये पंच परिवर्तन भारत को विकसित, संस्कारित और समरस राष्ट्र बनाने की आधारशिला हैं। कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक क्षेत्र से जुड़े प्रबुद्ध नागरिकों, युवाओं एवं बुद्धिजीवियों की उपस्थिति रही।