वैचारिक स्पष्टता और चरित्र की दृढ़ता ही उसकी वास्तविक शक्ति : प्रांत प्रचारक बाबूलाल

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बणी के बालाजी धाम समर्थपुरा में विराट हिन्दू सम्मेलन
सीकर। शेखावाटी में वीरता एवं आध्यात्मिकता दोनों की परंपरा रही है व इस पावन भूमि ने देश को सर्वाधिक सैनिक, उद्यमी सेठ और संत दिए हैं। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त प्रचारक बाबूलाल ने समर्थ बस्ती स्थित बणी के बालाजी धाम समर्थपुरा, सीकर में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में बोलते हुए कही साथ ही समाज को आत्ममंथन का संदेश देते हुए कहा कि केवल बाहरी प्रदर्शन से राष्ट्र सशक्त नहीं बनता, बल्कि वैचारिक स्पष्टता और चरित्र की दृढ़ता ही उसकी वास्तविक शक्ति होती है।

उन्होंने प्रोडक्ट और पैकेजिंग का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की पैकेजिंग यानी बाहरी दिखावे से कहीं अधिक उसका प्रोडक्ट—अर्थात नागरिक चरित्र, जीवन मूल्य और राष्ट्रीय निष्ठा-मजबूत होना चाहिए। कथनी और करनी की एकरूपता को उन्होंने विकसित भारत की बुनियादी शर्त बताया।

विकसित भारत की अवधारणा पर बोलते हुए बाबूलाल ने स्पष्ट किया कि यह सम्मेलन किसी जाति या पंथ विशेष का नहीं, बल्कि हर उस हिंदू का है जो राष्ट्र निर्माण में विश्वास रखता है। नागरिक कर्तव्यनिष्ठा, स्वदेशी भावना और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषय ही वास्तव में विकसित भारत का सशक्त रोडमैप हैं।

बड़ी संख्या में महिलाओं ने मंदिर परिसर से कलश यात्रा निकालकर हिन्दू सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ किया। पारंपरिक वेशभूषा, जयघोष और अनुशासित सहभागिता के साथ निकली इस यात्रा ने पूरे क्षेत्र को श्रद्धा, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकता के रंग में रंग दिया व पूरे परिसर में राष्ट्रचेतना, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का वातावरण दिखाई दिया
कार्यक्रम के मुख्या वक्ता बाबूलाल ने विश्वगुरु भारत की संकल्पना पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि जब हिंदू समाज संगठित होकर अपनी जड़ों, अपनी संस्कृति और स्वदेशी मूल्यों की ओर लौटेगा, तभी भारत माता पुनः विश्व गुरु के सिंहासन पर प्रतिष्ठित होंगी। पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का अंग बनाने पर बल देते हुए उन्होंने प्लास्टिक-मुक्त पृथ्वी का संकल्प भी दिलाया।

हिन्दू सम्मलेन में में रोरु बड़ी धाम के संत श्रीकमल नाथ महाराज का उपस्थित रहे। उन्होंने भारतीय विज्ञान, तिथि-प्रणाली और पारंपरिक कालगणना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण से बचने तथा भारतीय पद्धति से पर्व-उत्सव मनाने का संदेश दिया।

सम्मेलन के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विशिष्ट नागरिकों का सम्मान किया गया। आयोजकों द्वारा अतिथियों के कर-कमलों से समाजसेवियों एवं प्रबुद्धजनों को स्मृति-चिह्न भेंट कर उनकी सेवाओं का अभिनंदन किया गया।

डॉ. प्रियंका अमन मिश्रा ने भी मंच से हिन्दू समाज को संबोधित किया एवं भजन गायिका किरण बाईसा द्वारा भजनों की प्रस्तुति की गयी साथ ही स्कूली बच्चों द्वारा लगाई गई पोस्टर प्रदर्शनी तथा पारंपरिक सांस्कृतिक वेशभूषा की झांकियां कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहीं। सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ. भागचंद सैनी ने की। कार्यक्रम के समापन पर सभी स्थानीय नागरिकों को प्रसाद वितरित किया गया।