भारत माता की जय हमारा उदघोष मात्र नहीं, हमारे जीवन का संकल्प
सिरोही। संघ की प्रार्थना में भारत माता की जय बोली जाती है यह उदघोष मात्र नहीं हमारे जीवन का संकल्प है। हमारे जाति और पंथ भिन्न हो सकते हैं लेकिन राष्ट्र और धर्म के प्रश्न पर समस्त हिंदू समाज को एकजुट होना होगा। देवनगरी सिरोही के नागेश्वर बस्ती में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए जोधपुर प्रांत विद्यार्थी प्रमुख हरिकिशन कांकड़ ने मुख्य वक्ता के तौर पर संघ की शताब्दी यात्रा की पृष्ठभूमि में संगठित हिन्दू समाज और समर्थ भारत की संकल्पना पर विचार रखते हुए यह उदगार व्यक्त किए।
रविवार को नागेश्वर बस्ती के राधिका कॉलोनी स्थित हनुमानजी मंदिर प्रांगण में आयोजित हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता हरिकिशन ने बाल संस्कार, संस्कृति संरक्षण और संघ के पंच परिवर्तन-पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य, कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी और सामाजिक समरसता को जीवन में आत्मसात करने का आवाहन किया। उन्होंने गीत की पंक्तियों के माध्यम से महापुरुषों के द्वारा धर्म संस्कृति जागरण के लिए किए गए कालखंड के प्रवाह में बलिदानों को याद किया। हिंदू सनातन के गौरव का भान कराते हुए सवाल किया कि हमारे साथ पास सब कुछ था और हमारा इतिहास श्रेष्ठ रहा फिर हम गुलाम कैसे बने? कांकड़ ने कहा कि हम जब-जब अपनी जड़ों से कटे तब तब हमारा नुकसान हुआ।
उन्होंने कहा कि सनातन की पाचन शक्ति मजबूत रही है इसलिए जो भी आक्रांताओं ने इस भूमि पर हमले किए वे मिट गए या यहां समा गए। मुख्य वक्ता ने समाज में व्याप्त होती कुरीतिययो, बुराइयों पर प्रहार करते हुए कहा कि शक्ति और शौर्य की साधना जब-जब कमजोर हुई और उसके परिणाम स्वरुप उस कालखंड में समाज दुर्बल व असहाय बना। कहां की समाज में ज्ञान और संस्कार निर्माण हेतु सतत प्रयास होने चाहिए। मुख्य वक्ता ने परिवारों से अपील कर कहा कि आप घर में साथ बैठकर भोजन को प्रसाद समझकर ग्रहण करें तथा जीवन में मोबाइल से दूरी बनाने का प्रयास करें।
हरिकिशन ने समाज में संघ की भूमिका और वह क्यों के बारे में स्पष्ट करते हुए कहा कि 1925 में डॉक्टर हेडगेवार ने संघ स्थापना के वक्त कहा कि किसी भी समाज का उत्थान समाज की शक्ति से होता है और समाज की शक्ति व्यक्ति की शक्ति से आती है इसलिए संघ की शाखा के माध्यम से स्वयंसेवक नामक प्राणी समाज के परिवर्तन जागरण के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करते हुए समाज को आगे बढ़ाने में दिन-रात जुटा रहता है।
जिला प्रचारक योगेश कुमार ने राष्ट्र चेतना के ओजस्वी स्वर स्वरूप गीत के माध्यम से भारतीय सनातन संस्कृति का गौरव गान करते हुए इस राष्ट्र के महान मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की। कहां की गर्व से कहो हम हिंदू हैं। इसी क्रम में मानव धर्म सेवा आश्रम की साध्वी सुमुक्ता प्रिया ने भारतीय सनातन जीवन की पद्धति की श्रेष्ठता का बखान करते हुए धर्म एवं मानव धर्म पर विचार प्रकट कर सनातन शास्त्रों पर प्रकाश डाला।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने किया भाव विभोर
सम्मेलन के दौरान बालक बालिकाओं और नन्हे मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने संपूर्ण वातावरण को राष्ट्रीय भक्ति से ओतप्रोत ऊर्जावान बना दिया। गणेश वंदना के बाद सुश्री प्रांजल ने दुर्गा स्तुति पर एकल नृत्य, गौरी रावल ने रघुवर तेरी राह निहारे, कोमल शर्मा और ग्रुप द्वारा धर्मांतरण विषयक नाट्य प्रस्तुति, प्राची ग्रुप द्वारा महिला सशक्तिकरण प्रदर्शन, शिल्वी व जन्मा द्वारा माटी मेवाड़ की युगल नृत्य, रिद्धि सोनम द्वारा नृत्य करके इशारे, शशि पुरोहित द्वारा गीत राम मिले तो कहिजे रे, गायत्री परिवर्जक राधेश्याम द्वारा गीत मेरा भारत देश महान, कोमल शर्मा द्वारा लव जिहाद पर प्रस्तुति, किंजल माली एंड ग्रुप द्वारा राजस्थानी नृत्य, समीक्षासिंह द्वारा रानीपद्मावती कविता, अक्षरा एंड पार्टी द्वारा योद्धा बन गई मै, विभिन्न युग का परिचय कराते हुए नृत्य नाटीका प्रियांशी कृति द्वारा, दूर्वा द्वारा ओजस्वी राम पर कविता, प्रियदर्शनी द्वारा वीर रस कविता आदि ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संचालन कार्तिकेय शर्मा ने किया।
भारत माता आरती व पूजन से छठा निखरी
सम्मेलन पंडाल में देर रात्रि को टिमटिमाते हाथों में दीपक लेकर सभी स्त्री पुरुषों ने सामूहिक भारत माता आरती कर पूजन किया। यह आयोजन मात्र आस्था तक सीमित ना रहकर सामाजिक जन जागरण, एकता, सांस्कृतिक प्रेम और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करने वाला सिद्ध हुआ। सम्मेलन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बनकर बल्कि सनातन संस्कृति, सामाजिक चेतना और राष्ट्रबोध का प्रभावी मंच बनाकर सामने आया।
सामूहिक सहभोज में बरसी समरसता
बस्ती क्षेत्र के समस्त जाति बिरादरी के लोगों ने एक पंगत में बैठकर सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए भोजन प्रसाद ग्रहण किया। भव्य आयोजन ने स्पष्ट कर दिया कि आज का हिंदू समाज अपनी सांस्कृतिक संस्कारों और एकता के प्रति गंभीर व सजग है सम्मेलन जन आंदोलन का स्वरूप लेता नजर आया। आयोजन में समिति के अध्यक्ष रामचंद्र प्रजापत, सचिव मदनसिंह, कोषाध्यक्ष रताराम सुथार, संजय वर्मा, लोकेश खंडेलवाल, अनिल प्रजापत, छगन सुथार, संतोष शर्मा, डॉ उदयसिंह डिंगार, जगदीश प्रजापत, सीताराम, मोडाराम, प्रियंका खत्री, चित्रलेखा, जगदीश कुमार, नवलसिंह, पूजा भायल, डिंपल, टीना, निशा, गुणवंती, प्रेमलता खंडेलवाल, रमिला, प्रियंका, शीतल आदि का सहयोग।





