अजमेर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित किए जा रहे विराट हिन्दू सम्मेलन के क्रम में रविवार को सर्व समाज की ओर से पंचशील नगर के गोपेश्वर महादेव मंदिर उद्यान में विशाल आयोजन हुआ। इसमें बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिकों ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य धर्मजागरण, हिन्दू समाज में एकता स्थापित करना और युवाओं में राष्ट्रीय भावना की अलख को उर्जा प्रदान करना रहा।
वक्ताओं ने हिन्दू समाज से जाति-पात और भेदभाव को त्याग कर धर्म के प्रति एकजुटता का संदेश देते हुए केवल सनातन के सूत्र में बंधना ही ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का मार्ग बताया। इस मौके पर विशाल वाहन रैली निकाली गई साथ ही बच्चों के लिए देशभक्ति से ओत प्रोत प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
सम्मेलन के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व महानगर संघचालक सुनील जैन ने अपने संबोधन में नारी शक्ति का आवहान करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति में मान्यता है कि जहां नारी की पूजा होती है वहां देवता रमण करते हैं। नारी की वीरता से हमारा इतिहास भरा पडा है। उन्होंने कहा कि हमें यह सच जानना ही चाहिए कि देश के जिस हिस्से में हिन्दू अल्पसंख्यक हो गया वह हिस्सा कमजोर हो गया। यानी हिन्दू मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा।
उन्होंने कहा कि संघ संस्थापक केशव राव बलिराम हेडगेवार ने स्पष्टतौर पर कहा था ‘गर्व से कहो हम हिन्दू हैं’। संघ देश हित, समाज हित में काम करता है, यह कार्य 1925 से अनवरत जारी है। संघ अपनी 100 वर्ष की यात्रा पूर्ण कर चुका है। आगे की यात्रा में हम सब सहभागी हैं। उन्होंने कहा कि हम विश्व के कल्याण की बात करते हैं। लेकिन अब समय आ गया है कि पाश्चात्य चिंतन छोडें और हिन्दुत्व की बात हो, धर्म की बात भी हो, स्व भाषा, स्व भोजन, स्व भजन, स्व संस्कृति की चर्चा हो। यह देश गुरुगोविंद सिंह, महाराणा प्रताप, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई सरीखे वीरों की पावन धरा है।
हमें अपने कर्तव्यों के प्रति भी गंभीर होना पडेगा
आशीर्वचन देते हुए पुष्कर मार्ग नौसर घाटी स्थित प्राचीन रामदेव मंदिर के संत एवं मुख्य अतिथि विष्णु शास्त्री ने कहा कि संतों को धर्म ध्वजा को थामे रखने का दायित्व मिला है। हम आगे रहकर मार्गदर्शक बनें हुए हैं। हिन्दू समाज में भी निरंतर जागृति आ रही है। इस सबके साथ अब हमें अपने कर्तव्यों के प्रति भी गंभीर होना पडेगा। हम जो दूसरों से चाहते हैं, ठीक वैसा हम पर भी लागू होता है। समाज को हम क्या दे सकते हैं। यह कर्तव्य समझना ही होगा। उन्होंने सेना का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि सिर्फ खुब पोस्ट भर दी जाए लेकिन संख्याबल नहीं हो तो सेना कुछ नहीं कर सकती। यही बात हिन्दू समाज पर भी लागू होती है। बांग्लादेश के हालात हमारों सामने हैं, हिन्दू संख्याबल में कम होते ही अत्याचारों की चपेट में आ गया। आज भी कई स्थान ऐसे हैं जहां मंदिर होते हुए भी घंटी और शंख नहीं बजा सकते, मंत्रोच्चार नहीं किया जा सकता। अर्थात संख्याबल अत्यावश्यक है। इसके उलट हम विपरीत दिशा में जा रहे हैं। हमारा संख्या बल निरंतर घट रहा है।
जरूरी है कि हिन्दू समाज में युवक युवतियों का विवाह उचित समय पर हो जाए। इसमें विलंब करना भी संख्याबल कम होने का मुख्य कारण बन रहा है। सामाजिक दूरियां रिश्ते बनने में बाधक बन रही है। अच्छे पद और प्रतिष्ठा के बावजूद योग्य वर वधु नहीं मिल रहे। जनरेशन गेप बढ रहा है। ऐसे में कुटुम्ब प्रबोधन आवश्यक हो गया है। बहुतेरे ऐसे परिवार हो गए है जिनमें वर्तमान पीढी में चाचा, चाची, मौसी, बुआ जैसे रिश्ते खत्म से होते जा रहे है। जरूरी है की परिवार के बडे कुछ समय निकालें और बच्चों को अपनी संस्कृति, संस्कारों और धर्म से अवगत कराएं।
विशिष्ट अतिथि सामाजिक कार्यकर्ता बाला मेवाडा व तुलसी रामेश्वर मंदिर पंचशील के पुजारी भगवान दाधीच का भी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। आयोजन समिति की ओर से हरीश आनंद ने धन्यवाद ज्ञापित किया। साहित्य स्टाल पर अश्विन शर्मा, नवल किशोरशर्मा और रूपादास ने सेवाएं दीं। इस अवसर पर अंकुर माथुर, संतोष टेवानी, रविन्द्र भाटी, ज्ञान सिंह पंवार, कन्हैयालाल बूलचंदानी, दातार सिंह, गोविंद गुर्जर, भूपेन्द्र शर्मा समेत अनेक गणमान्यजन मौजूद रहे। प्रसादी के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।
विशाल वाहन रैली में गूंजे भारत माता के जयकारे
हिन्दू सम्मेलन से पूर्व दोपहर 2 बजे से भारत माता के जयकारे लगाते हुए विशाल वाहन रैली निकाली गई। रैली चन्द्रप्रभुनगर से आरंभ होकर विशाल नगर, भैरूबाडा, पंचशील बी ब्लाक, गणेश गुवाडी, डी मार्ट होते हुए सम्मेलन स्थल गोपेश्वर महादेव मंदिर उद्यान पहुंचकर सभा में परिवर्तित हो गई। मार्ग में धर्म प्रेमियों ने जगह जगह पुष्पवर्षा कर जोरदार स्वागत किया।
बच्चों के लिए देशभक्ति से ओतप्रोत प्रतियोगिताएं
सम्मेलन स्थल पर बच्चों व महिलाओं के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। सनातन धर्म प्रशनोत्तरी, महापुरुष बनो, देशभक्ति गीत, लोक नृत्य प्रतियोगिता में बडी संख्या में प्रतिभागियों ने बुद्धिकौशल दिखाया। विजेताओं को पारितोषिक, स्मृतिचिन्ह और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।




